2016 के एनडीपीएस मामले में दिल्ली अदालत ने 21 वर्षीय युवक को दोषी ठहराया

Delhi court acquits main accused in 2017 Paschim Vihar murder case

नई दिल्ली, 20 फरवरी (पीटीआई) दिल्ली की एक अदालत ने 200 ग्राम हेरोइन रखने के मामले में 21 वर्षीय युवक को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी का अपराध संदेह से परे साबित किया है।

विशेष न्यायाधीश Gajender Singh Nagar इक़बाल हुसैन के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे। उत्तर प्रदेश निवासी इक़बाल हुसैन पर 200 ग्राम हेरोइन रखने और दिल्ली में इसकी आपूर्ति करने का आरोप था।

18 फरवरी के आदेश में अदालत ने कहा, “एनडीपीएस अधिनियम की धारा 35 (दोषपूर्ण मानसिक अवस्था की धारणा) और धारा 54 (अवैध वस्तु के कब्जे से धारणा) के तहत यह माना जाता है कि आरोपी इक़बाल हुसैन के पास मादक पदार्थ/हेरोइन रखने का आवश्यक मानसिक तत्व (मेंस रिया) था और उसके पास इसे रखने का कोई वैध अधिकार या लाइसेंस नहीं था।”

अभियोजन के अनुसार, 26 मई 2016 को अपराध शाखा की नारकोटिक्स सेल ने गुप्त सूचना के आधार पर हुसैन को गिरफ्तार किया था। सूचना थी कि वह बरेली से हेरोइन लाकर दिल्ली में उसकी आपूर्ति कर रहा था।

अदालत ने उल्लेख किया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 50 के तहत आरोपी को यह कानूनी अधिकार बताया गया था कि उसकी तलाशी किसी राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ली जा सकती है, लेकिन उसने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

न्यायाधीश ने कहा, “ऐसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो हर मामले में बरामदगी की कार्यवाही का वीडियो या फोटो बनाना अनिवार्य करता हो। न ही ऐसा कोई साक्ष्य कानून है कि वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी के अभाव में अभियोजन गवाहों की गवाही पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”

अदालत ने कहा कि बरामदगी की वीडियो या फोटोग्राफिक साक्ष्य की अनुपस्थिति से अभियोजन का मामला संदेहास्पद नहीं हो जाता।

आदेश में कहा गया, “अभियोजन ने संदेह से परे यह साबित किया कि एनडीपीएस अधिनियम की धारा 52ए का पालन न होने से आरोपी के खिलाफ मामला प्रभावित नहीं होता, क्योंकि मौके से जब्त की गई केस प्रॉपर्टी को सील सही-सलामत हालत में प्राथमिक साक्ष्य के रूप में अदालत में पेश किया गया।”

बचाव पक्ष द्वारा प्रक्रियागत खामियों के आरोप पर अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की गवाही सुसंगत और विश्वसनीय है तथा अभियोजन के मूल मामले को प्रभावित करने वाला कोई ठोस विरोधाभास नहीं है।

इसके बाद अदालत ने आरोपी को एनडीपीएस अधिनियम के तहत दोषी करार दिया।