जल संकट गंभीर पर्यावरणीय मुद्दा, संरक्षण के लिए जनभागीदारी जरूरी: मुख्यमंत्री साय

**TO GO WITH CHHATTISGARH STORY** Jagdalpur: Chhattisgarh Chief Minister Vishnu Deo Sai speaks during the Bastar Pandum festival at Lalbagh Ground, in Jagdalpur, Tuesday, Feb. 10, 2026. (PTI Photo)(PTI02_10_2026_000171B)

नवा रायपुर, 20 फरवरी (पीटीआई) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने शुक्रवार को कहा कि जल संकट केवल एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता ही नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और विकासात्मक चुनौती भी है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को टिकाऊ और प्रभावी बनाने के लिए जनभागीदारी अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में ‘जल संचय-जन भागीदारी 2.0’ अभियान की राज्य में प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. Patil वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल को ‘प्रसाद’ की तरह मानने के संदेश का उल्लेख करते हुए साय ने जल उपयोग के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि कई जिलों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार मिले।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि सामुदायिक भागीदारी मॉडल के तहत बड़े पैमाने पर बोरवेल रिचार्ज, रूफटॉप वर्षा जल संचयन, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट और खुले कुओं के पुनर्भरण जैसे कार्य किए गए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में पांच क्रिटिकल और 21 सेमी-क्रिटिकल भूजल ब्लॉक चिह्नित किए गए हैं।

साय ने कहा, “2024 की तुलना में 2025 में इन पांच ब्लॉकों में भूजल दोहन में कमी और जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया, जो संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दर्शाता है। दूसरे चरण ‘जल संचय-जन भागीदारी 2.0’ में तकनीक-आधारित और परिणामोन्मुख रणनीति अपनाई गई है।”

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 31 मई तक 10 लाख जल संरक्षण संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा है। राज्य के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 10 एकड़ से अधिक भूमि वाले चार लाख से अधिक किसानों को खेत तालाब (डबरी) निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन औद्योगिक समूहों के साथ समन्वय में कार्य कर रहा है। इन संरचनाओं से भूजल स्तर में सुधार होगा और किसानों को सिंचाई व मत्स्य पालन जैसे अतिरिक्त लाभ मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में सभी जल संरचनाओं का जियो-टैगिंग, ग्राम पंचायतों के लिए जल बजट तैयार करना और जल सुरक्षा योजना बनाना शामिल है। अभियान के समर्थन के लिए गांवों के युवाओं को ‘जल मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों पर विशेष ध्यान देते हुए सेमी-क्रिटिकल ब्लॉकों में 40 प्रतिशत और क्रिटिकल ब्लॉकों में 65 प्रतिशत संरक्षण कार्यों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं, जल संरचनाओं की सुरक्षा करें और जिम्मेदार जल उपयोग की आदतें अपनाएं।

केंद्रीय मंत्री पाटिल ने राज्य के जल संरक्षण कार्यों और नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल करना राज्य के मजबूत प्रयासों का प्रमाण है।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2024 में सूरत से ‘जल संचय जन भागीदारी अभियान’ की शुरुआत की थी, जिसमें कार्यस्थल से लेकर अपने गांव-घर तक सामूहिक भागीदारी का आह्वान किया गया था, ताकि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाया जा सके।”

पाटिल ने सभी कलेक्टरों से मनरेगा के तहत प्राप्त निधियों का जल संरक्षण कार्यों में पूर्ण और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

उन्होंने राजनांदगांव की एक महिला सरपंच की भी सराहना की, जिन्होंने अपने प्रयासों से उल्लेखनीय जल संरक्षण कार्य किए।