ठाणे, 23 फरवरी (पीटीआई) ठाणे के Motor Accident Claims Tribunal, Thane (एमएसीटी) ने 2018 में हुए एक सड़क हादसे में स्थायी रूप से विकलांग हुई एक महिला दर्जी को 20.9 लाख रुपये और एक घरेलू सहायिका को 7.7 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
दर्जी को दोनों पैरों में लकवा होने के कारण 80 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हुई थी, लेकिन एमएसीटी ने यह कहते हुए उनकी कार्यात्मक विकलांगता 50 प्रतिशत आंकी कि आधुनिक इलेक्ट्रिक सिलाई मशीनें हाथ और कोहनी से भी चलाई जा सकती हैं।
एमएसीटी सदस्य आर. वी. मोहिते ने 12 फरवरी को पारित दो अलग-अलग आदेशों में ट्रेलर ट्रक के बीमा कंपनी को पहले चरण में मुआवजे की राशि अदा करने और बाद में “जानबूझकर बीमा शर्तों के उल्लंघन” के कारण वाहन मालिक से वसूली करने का निर्देश दिया। आदेश की प्रति सोमवार को प्राप्त हुई।
यह घटना 24 अप्रैल 2018 को हुई थी, जब रत्ना विजय भगवत (44), जो घरेलू सहायिका हैं, और सायली विजय सालुंखे (35), जो दर्जी हैं, एक लग्जरी बस में यात्रा कर रही थीं।
पड़ोसी राज्य गुजरात के वलसाड जिले में एक पुल के पास पहुंचने पर बस राष्ट्रीय राजमार्ग की पहली लेन पर बिना किसी संकेत, लाइट या चेतावनी के खड़े ट्रेलर के पीछे जा टकराई। टक्कर में बस के दो चालकों की मौत हो गई और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए।
मोहिते ने कहा कि यह हादसा “सांझा लापरवाही” (कॉम्पोजिट नेग्लिजेंस) का मामला था। ट्रेलर को लापरवाही से हाईवे पर खड़ा किया गया था, जिससे वह बस चालक को दिखाई नहीं दिया। साथ ही दुर्घटना की तारीख पर ट्रेलर के पास वैध फिटनेस प्रमाणपत्र भी नहीं था, जो बीमा शर्तों का उल्लंघन है।
सालुंखे को 80 प्रतिशत स्थायी विकलांगता हुई, जबकि एमएसीटी ने उनकी कार्यात्मक विकलांगता 50 प्रतिशत मानी। उन्हें भविष्य के चिकित्सा खर्च के लिए 1.5 लाख रुपये सहित कुल 20,92,510 रुपये मुआवजा दिया गया।
भगवत को कमर के निचले हिस्से में चोट के कारण 51 प्रतिशत स्थायी आंशिक विकलांगता हुई। उनकी कार्यात्मक विकलांगता 30 प्रतिशत आंकी गई और उन्हें 7,75,653 रुपये मुआवजा प्रदान किया गया।
न्यायाधिकरण ने मुआवजा राशि याचिका दायर करने की तिथि से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया। साथ ही भगवत के लिए 2 लाख रुपये और सालुंखे के लिए 3 लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में रखने का निर्देश भी दिया।
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