मार्शल लॉ आदेश पर उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपदस्थ दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यून की अपील

South Korea's ousted President Yoon Suk Yeol, who is facing charges of orchestrating a rebellion when he declared martial law on Dec. 3, attends his criminal trial at a courtroom of the Seoul Central District Court in Seoul Monday, April 21, 2025. (AP/PTI)(AP04_21_2025_000011B)

सियोल, 24 फरवरी (एपी) दक्षिण कोरिया के जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल ने दिसंबर 2024 में लगाए गए संक्षिप्त मार्शल लॉ के लिए राजद्रोह के मामले में मिली उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील दायर की है। उनके वकीलों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सत्ता हथियाने के प्रयास को लेकर कई मुकदमों का सामना कर रहे इस रूढ़िवादी नेता ने पिछले सप्ताह सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दोषी ठहराए जाने के बाद भी विरोध का रुख अपनाया। उन्होंने फैसले को अतार्किक बताया, कहा कि उनके कदम “केवल राष्ट्र और हमारे लोगों के हित में” थे, और न्यायाधीश पर उनके खिलाफ पक्षपात का आरोप लगाया।

एक टेक्स्ट संदेश में यून के वकीलों ने कहा कि वे पिछले गुरुवार के फैसले में कथित “तथ्य निर्धारण में त्रुटियों और कानून की गलत व्याख्याओं” को चुनौती देना चाहते हैं। अब यह मामला सियोल हाई कोर्ट की एक विशेष पीठ को भेजा जाएगा, जिसे दिसंबर में पारित कानून के तहत विद्रोह, देशद्रोह और विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए स्थापित किया गया है।

यून की कानूनी टीम ने कहा, “हम विशेष अभियोजक द्वारा लगाए गए अत्यधिक आरोपों, उसी आधार पर निचली अदालत द्वारा दिए गए विरोधाभासी फैसले और उससे जुड़ी राजनीतिक परिस्थितियों के खिलाफ कभी चुप नहीं रहेंगे।”

यून का मार्शल लॉ आदेश 3 दिसंबर 2024 की देर रात घोषित किया गया था और लगभग छह घंटे तक लागू रहा। भारी हथियारों से लैस सैनिकों और पुलिस द्वारा नेशनल असेंबली की घेराबंदी तोड़कर विधायकों का कोरम पूरा होने के बाद इसे रद्द करने के लिए मतदान किया गया, जिससे उनके मंत्रिमंडल को यह आदेश वापस लेना पड़ा।

14 दिसंबर 2024 को उदारवादी नेतृत्व वाली विधायिका द्वारा महाभियोग लगाए जाने के बाद यून को पद से निलंबित कर दिया गया और अप्रैल 2025 में संवैधानिक न्यायालय ने उन्हें औपचारिक रूप से पद से हटा दिया। जुलाई में उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया और अब वे मार्शल लॉ प्रकरण और अन्य आरोपों से जुड़े आठ आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे हैं, जिनमें राजद्रोह का आरोप सबसे कठोर सजा वाला है।

यद्यपि यह आदेश अल्पकालिक था, लेकिन इससे देश में दशकों की सबसे गंभीर राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया, जिससे राजनीति और उच्चस्तरीय कूटनीति ठप हो गई तथा वित्तीय बाजारों में अस्थिरता आ गई। यह उथल-पुथल पिछले जून में उनके उदारवादी प्रतिद्वंद्वी ली जे म्युंग के प्रारंभिक राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ही कम हुई।

यून का दावा है कि उनका मार्शल लॉ आदेश विधायिका पर नियंत्रण रखने वाले उदारवादियों के खिलाफ शासन का एक कानूनी और आवश्यक कदम था। उन्होंने उन्हें “राष्ट्र-विरोधी” ताकतें बताया, जो उच्च अधिकारियों के खिलाफ महाभियोग, उनके बजट में कटौती और उनके एजेंडे में बाधा डालकर राज्य के कामकाज को पंगु बना रही थीं।

लेकिन सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कहा कि यून की कार्रवाइयां विद्रोह की साजिश के बराबर थीं और उन्होंने सैनिकों तथा पुलिस को अवैध रूप से तैनात कर विधायिका पर कब्जा करने, राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार करने और “काफी समय” तक निरंकुश शासन स्थापित करने की कोशिश की। यून के खिलाफ विद्रोह के आरोपों की जांच करने वाले विशेष अभियोजक ने उनके कृत्यों से देश के लोकतंत्र को हुए खतरे को देखते हुए मृत्युदंड की मांग की थी। पिछले सप्ताह के फैसले के बाद विशेष अभियोजक की जांच टीम के सदस्य जांग वू-सुंग ने संकेत दिया कि वे भी अपील करना चाहते हैं और अदालत के कुछ तथ्यात्मक निष्कर्षों तथा सजा की कठोरता पर “आपत्तियां” जताईं।

दक्षिण कोरिया ने 1997 के बाद से किसी भी मृत्युदंड प्राप्त कैदी को फांसी नहीं दी है, जिसे व्यापक रूप से मृत्युदंड पर वास्तविक स्थगन और इसे समाप्त करने की जन मांग के रूप में देखा जाता है।

यून 1996 में 1979 के तख्तापलट, 1980 में ग्वांगजू में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर खूनी दमन जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गए या लापता हुए, और भ्रष्टाचार के मामलों में मौत की सजा पाए पूर्व सैन्य तानाशाह चुन डू-ह्वान के बाद उम्रकैद पाने वाले पहले दक्षिण कोरियाई पूर्व राष्ट्रपति हैं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुन की सजा को उम्रकैद में बदल दिया और 1997 के अंत में विशेष राष्ट्रपति क्षमादान के तहत उन्हें रिहा कर दिया गया। (एपी) एएमएस एएमएस

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