
रायपुर, 25 फरवरी (पीटीआई) — तेलंगाना में माओवादियों के पोलित ब्यूरो सदस्य देवुजी उर्फ थिप्पिरी तिरुपति और तीन अन्य वरिष्ठ ऑपरेटिव्स के आत्मसमर्पण को वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक और निर्णायक क्षण बताया गया है। छत्तीसगढ़ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) सुंदरराज पाटिलिंगम ने मंगलवार को कहा कि माओवादी नेतृत्व संरचना का लगातार कमजोर होना संगठन के संभावित पतन और दशकों से जारी रक्तपात के अंत की ओर संकेत करता है।
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले चार वरिष्ठ माओवादी कैडर — देवुजी (62), केंद्रीय समिति सदस्य मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम (76), तेलंगाना राज्य समिति सचिव बड़े चोक्का राव उर्फ दामोदर और दंडकारण्य विशेष जोनल समिति सदस्य गंगन्ना — प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) की शीर्ष संरचना के प्रमुख सदस्य रहे हैं और कई दशकों से भूमिगत थे।
आईजीपी ने कहा, “उनका आत्मसमर्पण वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक मोड़ है।”
उन्होंने कहा कि हिंसा और सशस्त्र संघर्ष का त्याग करना जमीनी परिस्थितियों में निर्णायक बदलाव और इस स्पष्ट स्वीकारोक्ति को दर्शाता है कि हिंसा के लिए जगह सिमट रही है, जबकि शांति और विकास की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
पाटिलिंगम ने बताया कि बस्तर क्षेत्र — जिसकी सीमाएं तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र से लगती हैं — में सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई, बेहतर शासन व्यवस्था और स्थानीय समुदायों की बढ़ती आकांक्षाओं ने परिवर्तन के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।
उन्होंने कहा, “जब इतने वरिष्ठ स्तर के कैडर तीन से चार दशकों तक भूमिगत रहने के बाद मुख्यधारा में लौटते हैं, तो यह दर्शाता है कि संगठन के भीतर यह एहसास बढ़ रहा है कि उग्रवाद का रास्ता अपनी सीमा पर पहुंच चुका है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज की यह घटना प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ प्रभावशाली भी है। यह शेष कैडरों को स्पष्ट संदेश देती है कि आंदोलन अब पहले जैसा प्रभाव और वैचारिक दृढ़ता नहीं रखता। साथ ही यह जनता के विश्वास को भी मजबूत करती है कि स्थायी शांति अब दूर का लक्ष्य नहीं, बल्कि उभरती हुई वास्तविकता है।”
आईजीपी ने कहा कि वर्षों से हिंसा और अस्थिरता झेल रहे बस्तर क्षेत्र में अब स्थायी स्थिरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की संभावना है।
उन्होंने शेष कैडरों से बदलती परिस्थितियों को समझते हुए मुख्यधारा में लौटने की अपील की और आश्वासन दिया कि पुनर्वास और सम्मानजनक पुनर्समावेशन का मार्ग खुला है, जबकि सुरक्षा बल शांति और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ हैं।
उन्होंने कहा, “हिंसा का दौर अब समाप्ति की ओर है और भविष्य शांति, प्रगति तथा स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं में निहित है।”
अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 532 माओवादी मारे गए, 2,704 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया और 2,004 को गिरफ्तार किया गया है।
राज्य में सबसे उल्लेखनीय अभियानों में पिछले वर्ष प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के महासचिव और शीर्ष नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू (70) की मुठभेड़ में मौत शामिल है। उनके साथ केंद्रीय समिति के पांच सदस्य — रामचंद्र रेड्डी उर्फ जयराम उर्फ चलपति, गौतम उर्फ सुधाकर, मोडेम बालकृष्ण, राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कोसा दादा उर्फ कदरी सत्यनारायण रेड्डी — भी मारे गए थे।
पड़ोसी राज्यों में भी कुछ अन्य शीर्ष ऑपरेटिव्स या तो मारे गए या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है।
अधिकारियों के मुताबिक, वर्तमान में संगठन में केवल दो शीर्ष ऑपरेटिव्स सक्रिय हैं — मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, जो पोलित ब्यूरो सदस्य और केंद्रीय समिति के सलाहकार हैं, तथा मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, जो पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्य हैं। PTI TKP NP GK
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