
नई दिल्ली, 25 फरवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बीएनएसएस के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। इन प्रावधानों में सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को निदेशक तथा सेवारत न्यायिक अधिकारियों को उपनिदेशक अभियोजन और सहायक निदेशक अभियोजन के रूप में नियुक्त करने की अनुमति दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि याचिका भ्रांतिपूर्ण है और इसका कोई कानूनी आधार नहीं है।
याचिकाकर्ता सुबीश पी एस ने अधिवक्ता सुविदत्त एम एस के माध्यम से दायर याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) की धारा 20 की उपधाराओं (2)(क) और (2)(ख) में निहित प्रावधानों की वैधता को चुनौती दी थी।
याचिका में कहा गया, “यह चुनौती इस आधार पर उठाई गई है कि विवादित प्रावधान, यद्यपि अभियोजन तंत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं, परंतु वास्तव में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करते हैं, क्योंकि वे न्यायपालिका के सदस्यों को कार्यपालिका के नियंत्रण वाले अभियोजन पदों में शामिल करते हैं, जिससे न्यायिक और कार्यपालिका के कार्यों का अस्वीकार्य रूप से विलय हो जाता है।”
इसमें आगे कहा गया कि इस प्रकार का समावेशन शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संविधान की मूल संरचना का एक आवश्यक अंग है।
रिट याचिका में कहा गया, “उक्त प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं तथा संविधान के अनुच्छेद 50 और 235 में निहित संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत हैं।” PTI PKS MNL SJK VN VN
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