केवल ब्रेकअप आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

Delhi High Court

नई दिल्ली, 25 फरवरी (पीटीआई) केवल संबंध टूटना आपराधिक कानून के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने (एबेटमेंट) का मामला नहीं बनाता, यह टिप्पणी दिल्ली उच्च न्यायालय ने की है।

न्यायमूर्ति मनोज जैन ने यह टिप्पणी उस व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिस पर अपनी पूर्व साथी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। महिला ने आरोपी के दूसरी महिला से विवाह के पांच दिन बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि उकसावा ऐसा होना चाहिए, जिससे मृतक के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।

अदालत ने कहा कि यह केवल मुकदमे के दौरान ही स्पष्ट हो सकेगा कि मृतका का “चरम कदम” किसी उकसावे या भड़कावे के कारण था, “सिर्फ उसके अत्यधिक संवेदनशील होने” की वजह से था या किसी अन्य कारण से।

वर्तमान मामले में अदालत ने नोट किया कि कोई मृत्यु-पूर्व बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) नहीं है और दोनों लगभग आठ वर्षों तक संबंध में थे, इस दौरान मृतका की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई थी।

अदालत ने यह भी कहा कि दोनों के बीच बातचीत बंद होने की तारीख और आत्महत्या की तारीख के बीच पर्याप्त समय का अंतर था।

24 फरवरी को पारित आदेश में अदालत ने कहा, “प्रथम दृष्टया यह एक टूटे हुए संबंध का मामला प्रतीत होता है और संभवतः मृतका ने यह जानने के बाद कि आवेदक ने किसी अन्य से विवाह कर लिया है, स्वयं जीवन समाप्त करने का निर्णय लिया।”

आदेश में कहा गया, “हालांकि आजकल टूटे संबंध और दिल टूटना आम हो गया है, लेकिन केवल संबंध विच्छेद अपने आप में ऐसा उकसावा नहीं माना जा सकता, जिससे भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला बन जाए।”

मृतका के पिता के अनुसार, उनकी बेटी को आरोपी ने अपने जाल में फंसाया था और विवाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया था। इसी दबाव में उनकी बेटी ने अक्टूबर 2025 में चुन्नी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

आरोपी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।

अदालत ने कहा कि महिला की सहेलियों के अनुसार वह परेशान थी, लेकिन उन्होंने धर्म परिवर्तन को लेकर कोई दावा नहीं किया। आदेश में कहा गया कि आरोपी ने फरवरी 2025 से उससे बातचीत बंद कर दी थी।

आदेश के मुताबिक, आरोपी को 25-25 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानती बांड पर जमानत दी गई है।

आरोपी ने दलील दी कि दोनों लगभग आठ वर्षों तक सौहार्दपूर्ण संबंध में थे, लेकिन अलग-अलग धर्मों से होने के कारण महिला के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे।

उसने आरोप लगाया कि महिला के माता-पिता ने ही उस पर संबंध समाप्त करने का दबाव डाला था। पीटीआई ADS VN VN

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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