
नई दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा)। दिल्ली सरकार ने अगले दो वर्षों में 16,000 से अधिक कारीगरों और उनके परिवारों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से खादी श्रमिकों के लिए एक कौशल विकास योजना की घोषणा की है।
दिल्ली खादी कौशल विकास योजना नामक इस योजना को दिल्ली खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (डीकेवीआईबी) द्वारा लागू किया जाएगा
इस पहल के तहत, प्रशिक्षुओं को स्व-रोजगार और उद्यमशीलता गतिविधियों का समर्थन करने के लिए भोजन और मुफ्त उपकरण किट के साथ प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रति दिन 400 रुपये का वजीफा मिलेगा।
योजना की एक प्रमुख विशेषता ई-कैटलॉग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ है, जिसके तहत प्रत्येक प्रशिक्षित कारीगर को उत्पादों को प्रदर्शित करने और बाजार संबंधों को मजबूत करने के लिए डिजिटल पहुंच प्रदान की जाएगी। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह देश में राज्य खादी बोर्डों के बीच इस तरह की पहली पहल है।
इस कार्यक्रम में रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) मर्चेंडाइज़र, डॉक्यूमेंटेशन एग्जीक्यूटिव, आईटी हेल्प डेस्क अटेंडेंट, सेल्फ-एम्प्लॉयड टेलर, पैटर्न मास्टर और फैशन क्लोदिंग प्रोडक्शन सहित कई ट्रेड शामिल होंगे।
इस पहल से उन कारीगरों को लाभ होगा जो कम से कम पांच साल से दिल्ली के निवासी हैं।
यह निर्णय दिल्ली के उद्योग मंत्री और डीकेवीआईबी के अध्यक्ष मंजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में बोर्ड मुख्यालय में आयोजित 55वीं बोर्ड बैठक में लिया गया।
सिरसा ने कहा, “ई-कैटलॉग के माध्यम से कौशल विकास, वित्तीय सहायता, टूल किट और डिजिटल बाजार तक पहुंच को मिलाकर, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हमारे कारीगर आत्मनिर्भर उद्यमी बनें।
इस योजना को पहले ही दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और इसे वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान लागू किया जाएगा। पीटीआई एमएसजे वीआईटी एमआर
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