कार्यशील सीसीटीवी की कमी पर बैठक में भाग लेने का सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया

New Delhi: People outside the Supreme Court of India on a winter morning, in New Delhi, Tuesday, Dec. 16, 2025. (PTI Photo/Shahbaz Khan)(PTI12_16_2025_000046B)

नई दिल्ली, 26 फरवरी (पीटीआई) सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्र और अन्य पक्षों को पुलिस थानों में सीसीटीवी अवसंरचना के मानकीकरण और एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड के निर्माण के लिए आयोजित बैठक में भाग लेने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे की दलील के बाद यह आदेश पारित किया। न्यायालय के अमिकस क्यूरी के रूप में सहायता कर रहे दवे ने अदालत को बताया कि 29 जनवरी के आदेश के अनुपालन में 21 फरवरी को एक बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन केंद्र, दिल्ली सरकार और कुछ अन्य राज्यों ने उसमें भाग नहीं लिया, और इस कारण वह आवश्यक रिपोर्ट दाखिल नहीं कर सके।

दलील पर ध्यान देते हुए अदालत ने आदेश दिया, “भारत संघ के वकील पहले ही माफी मांग चुके हैं कि कुछ संचार अंतर के कारण वे बैठक में भाग नहीं ले सके। हालांकि, उन्होंने हमें आश्वासन दिया है कि अगली बैठक में वे पूरा सहयोग करेंगे।” पीठ ने जोड़ा, “अमिकस ने अगली बैठक के लिए 14 मार्च, 2026 की तारीख सुझाई है। पूर्व में दिए गए निर्देशानुसार 14 मार्च, 2026 को बैठक आयोजित की जाए।” मामले की अगली सुनवाई अब 23 मार्च को निर्धारित है।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए पुलिस थानों में कार्यशील सीसीटीवी की कमी के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका दर्ज करने का निर्देश दिया था।

शीर्ष अदालत ने 2018 में मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंकुश लगाने के लिए सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था।

दिसंबर 2020 में शीर्ष अदालत ने केंद्र को सीबीआई, ईडी और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित जांच एजेंसियों के कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाने का निर्देश दिया था।

अदालत ने कहा था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पुलिस थाने में, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉक-अप, गलियारों, लॉबी और स्वागत कक्ष के साथ-साथ लॉक-अप कमरों के बाहर भी सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि कोई भी हिस्सा अछूता न रहे।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि सीसीटीवी प्रणालियों में नाइट विजन की सुविधा होनी चाहिए और उनमें ऑडियो तथा वीडियो दोनों की रिकॉर्डिंग होनी चाहिए।

अदालत ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनिवार्य किया था कि वे ऐसे सिस्टम खरीदें जिनमें कम से कम एक वर्ष तक डेटा संग्रहित करने की क्षमता हो। PTI PKS VN VN

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