ईरानी मंत्री ने कहा, अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता देश की सबसे तीव्र वार्ताओं में से एक

Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi leaves after attending a conference titled "International Law Under Assault: Aggression and Self-Defense," in Tehran, Iran, Sunday, Nov. 16, 2025.AP/PTI(AP11_16_2025_000235B)

जिनेवा, 27 फरवरी (एपी) ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ताएं देश की “सबसे तीव्र और सबसे लंबी वार्ताओं में से एक” हैं। अब्बास अराघची ने गुरुवार को ईरानी राज्य टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में यह टिप्पणी की। उन्होंने कोई विशेष विवरण नहीं दिया, लेकिन कहा, “हमारी ओर से जो होना चाहिए, वह स्पष्ट रूप से बताया गया है।” अमेरिका ने अभी तक इन वार्ताओं पर कोई टिप्पणी नहीं की है। व्हाइट हाउस ने भी टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी।

ईरान और अमेरिका ने गुरुवार को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर घंटों अप्रत्यक्ष वार्ता की, लेकिन बिना किसी समझौते के अलग हो गए, जिससे एक और मध्य-पूर्व युद्ध का खतरा बना हुआ है, जबकि अमेरिका ने क्षेत्र में विमानों और युद्धपोतों का एक विशाल बेड़ा तैनात किया है।

जिनेवा में वार्ता की मध्यस्थता करने वाले ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा कि “वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया।

लेकिन वार्ता समाप्त होने से ठीक पहले ईरानी राज्य टेलीविजन ने बताया कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के लिए दृढ़ है, उसे विदेश भेजने के प्रस्तावों को खारिज करता है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने की मांग करता है, जिससे संकेत मिलता है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं है।

ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए एक समझौता चाहते हैं और उनका मानना है कि देश में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद बढ़ते असंतोष के कारण घरेलू स्तर पर संघर्ष कर रहे ईरान के साथ यह एक अवसर है। ईरान भी युद्ध टालना चाहता है, लेकिन उसका कहना है कि उसे यूरेनियम संवर्धन का अधिकार है और वह अन्य मुद्दों, जैसे उसकी लंबी दूरी की मिसाइल कार्यक्रम या हमास और हिजबुल्लाह जैसे सशस्त्र समूहों को समर्थन, पर चर्चा नहीं करना चाहता।

अल-बुसैदी ने कहा कि तकनीकी स्तर की वार्ताएं अगले सप्ताह वियना में जारी रहेंगी, जहां अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का मुख्यालय है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था किसी भी समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि, न तो अमेरिकियों और न ही ईरानियों ने तत्काल कोई टिप्पणी की।

एक बेहद भयावह परिदृश्य – दांव शायद ही इससे ऊंचा हो सकता है।

यदि अमेरिका हमला करता है, तो ईरान ने कहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को वैध लक्ष्य माना जाएगा, जिससे हजारों अमेरिकी सैनिकों को खतरा हो सकता है। ईरान ने इजराइल पर हमला करने की भी धमकी दी है, जिसका मतलब है कि एक क्षेत्रीय युद्ध फिर से पूरे मध्य-पूर्व में फैल सकता है।

“किसी के लिए भी कोई जीत नहीं होगी — यह एक विनाशकारी युद्ध होगा,” ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा रवाना होने से ठीक पहले बुधवार को रिकॉर्ड किए गए एक साक्षात्कार में इंडिया टुडे से कहा।

“चूंकि अमेरिकी ठिकाने क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर फैले हुए हैं, तो दुर्भाग्य से शायद पूरा क्षेत्र इसमें शामिल हो जाएगा, इसलिए यह एक बहुत ही भयावह परिदृश्य है।” इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान विशेषज्ञ अली वाएज ने कहा कि यह अच्छा संकेत है कि गुरुवार को ईरान द्वारा अपना नवीनतम प्रस्ताव पेश करने पर अमेरिकी तुरंत वार्ता से नहीं हटे।

उन्होंने कहा, “दिन के अंत तक कोई सफलता न भी मिले, लेकिन यह तथ्य कि अमेरिकी टीम लौट रही है, दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच पर्याप्त समान आधार मौजूद है।”

जिनेवा वार्ता जून के युद्ध के बाद तीसरी बैठक — दोनों पक्षों ने पिछले वर्ष कई दौर की वार्ता की थी, जो जून में इजराइल द्वारा ईरान पर 12-दिवसीय युद्ध शुरू करने और अमेरिका द्वारा उसके परमाणु स्थलों पर भारी हमले करने के बाद विफल हो गई थी। इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी हद तक नष्ट हो गया, हालांकि नुकसान की पूरी सीमा अभी स्पष्ट नहीं है।

वार्ता में ईरान का प्रतिनिधित्व अराघची ने किया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ट्रंप के मित्र और विशेष मध्य-पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ ने किया, जिनके साथ ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी थे। वार्ता की मध्यस्थता फिर से ओमान ने की, जो लंबे समय से ईरान और पश्चिम के बीच संवाद का माध्यम रहा है।

करीब तीन घंटे की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने विराम लिया और बाद में चर्चा फिर से शुरू की।

विराम के दौरान ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने कहा कि राजनयिकों ने “बहुत गहन” वार्ता की। उन्होंने कहा कि ईरानियों को लगा कि परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों में राहत दोनों पर “रचनात्मक प्रस्ताव” पेश किए गए।

ट्रंप चाहते हैं कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करे और अपने लंबी दूरी के मिसाइल कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन को वापस ले। ईरान का कहना है कि वह केवल परमाणु मुद्दों पर चर्चा करेगा और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

अमेरिका को संदेह है कि ईरान अपना कार्यक्रम फिर से बना रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा कि ईरान “हमेशा अपने परमाणु कार्यक्रम के तत्वों को फिर से बनाने की कोशिश करता रहता है।” उन्होंने कहा कि तेहरान अभी यूरेनियम संवर्धन नहीं कर रहा है, “लेकिन वे उस स्थिति तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जहां वे अंततः ऐसा कर सकें।” ईरान ने कहा है कि उसने जून के बाद से संवर्धन नहीं किया है, लेकिन उसने उन स्थलों पर आईएईए निरीक्षकों को जाने से रोका है जिन पर अमेरिका ने बमबारी की थी। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा विश्लेषित उपग्रह तस्वीरों में उन दो स्थलों पर गतिविधि दिखाई गई है, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान वहां सामग्री का आकलन और संभावित रूप से पुनर्प्राप्ति करने की कोशिश कर रहा है।

पश्चिम और आईएईए का कहना है कि ईरान के पास 2003 तक परमाणु हथियार कार्यक्रम था। ट्रंप द्वारा 2015 के परमाणु समझौते को रद्द करने के बाद, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 60 प्रतिशत शुद्धता तक बढ़ा दिया — जो 90 प्रतिशत हथियार-स्तर की शुद्धता से तकनीकी रूप से एक छोटा कदम दूर है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ईरान ने अभी तक हथियार कार्यक्रम फिर से शुरू नहीं किया है, लेकिन उसने “ऐसी गतिविधियां की हैं जो उसे परमाणु उपकरण बनाने की बेहतर स्थिति में रखती हैं, यदि वह ऐसा करने का निर्णय ले।” कुछ ईरानी अधिकारियों ने खुलकर कहा है कि यदि निर्णय लिया जाता है तो देश बम बनाने के लिए तैयार है।

सैन्य कार्रवाई की धमकी से युद्ध की आशंका — यदि वार्ता विफल होती है, तो किसी संभावित अमेरिकी हमले के समय को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।

यदि संभावित सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य परमाणु वार्ता में रियायतें दिलाने के लिए दबाव बनाना है, तो यह स्पष्ट नहीं है कि सीमित हमले काम करेंगे या नहीं। यदि लक्ष्य ईरान के नेताओं को हटाना है, तो इससे संभवतः अमेरिका को बड़े और लंबे सैन्य अभियान में शामिल होना पड़ेगा। इसके बाद क्या होगा, इसमें ईरान में संभावित अराजकता भी शामिल है, इसकी कोई सार्वजनिक योजना दिखाई नहीं देती।

यह भी अनिश्चित है कि किसी सैन्य कार्रवाई का व्यापक क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा। तेहरान फारस की खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों या इजराइल के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर सकता है। हाल के दिनों में इन चिंताओं के कारण तेल की कीमतें बढ़ी हैं और बेंचमार्क ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। पिछली वार्ता के दौरान ईरान ने कहा था कि उसने फारस की खाड़ी के संकरे प्रवेश द्वार होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात को संक्षिप्त रूप से रोक दिया था, जहां से वैश्विक व्यापारित तेल का पांचवां हिस्सा गुजरता है।

प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा मंगलवार और बुधवार को ली गई तथा एपी द्वारा विश्लेषित उपग्रह तस्वीरों से प्रतीत होता है कि बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय पर सामान्यतः तैनात अमेरिकी जहाज समुद्र में निकल गए थे। पांचवें बेड़े ने सवालों को अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड को भेज दिया, जिसने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। पिछले जून में युद्ध के अंतिम दिनों में कतर में अमेरिकी अड्डे पर ईरानी हमले से पहले भी पांचवें बेड़े ने संभावित हमले से बचाव के लिए अपने जहाजों को समुद्र में फैला दिया था। (एपी) एमपीएल एमपीएल

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