आरक्षण लाभ का दावा चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नहीं किया जा सकता: उत्तराखंड उच्च न्यायालय

नैनीताल, 26 फरवरी (PTI) – उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने निर्णय दिया है कि यदि कोई उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के दौरान आरक्षण का लाभ नहीं लेता है, तो बाद में वह इसके वंचित होने की शिकायत नहीं कर सकता।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकल-न्यायाधीश पीठ ने विज्ञान धारा में सहायक शिक्षक (प्राथमिक) पद के चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने उत्तराखंड राज्य स्थापना कार्यकर्ताओं को प्रदान किए गए क्षैतिज आरक्षण श्रेणी के तहत की गई नियुक्ति में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया।

याचिकाकर्ता ने भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया था और दावा किया था कि चंपावत जिले के लिए चयनित उम्मीदवार को उससे कम अंक मिलने के बावजूद नियुक्त किया गया।

अपनी याचिका के माध्यम से याचिकाकर्ता ने 28 जनवरी 2026 को प्रकाशित चयन सूची को रद्द करने, उत्तरदाता की नियुक्ति रद्द करने और मेरिट के आधार पर अपनी नियुक्ति के निर्देश मांगने की अपील की थी।

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चयनित उम्मीदवार ने राज्य स्थापना कार्यकर्ता योजना का लाभ उठाया था। इस प्रावधान के तहत उत्तराखंड राज्य स्थापना कार्यकर्ताओं और उनके आश्रितों को राज्य सेवा में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण मिलता है। प्रश्न में नियुक्ति इसी श्रेणी के तहत की गई थी।

भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि सरकार के आदेशों के अनुसार क्षैतिज आरक्षण लागू होगा। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि वह भी राज्य स्थापना कार्यकर्ता श्रेणी से संबंधित है, लेकिन चयन प्रक्रिया के दौरान उसने इस लाभ का दावा नहीं किया।

अदालत ने फैसला सुनाया कि उम्मीदवार उचित चरण में दावा किए बिना ऐसे आरक्षण लाभ की कमी की शिकायत नहीं कर सकता। अदालत ने यह भी नोट किया कि चूंकि उत्तरदाता को विशेष आरक्षित श्रेणी के तहत नियुक्त किया गया था, इसलिए उसकी मेरिट की तुलना सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से सीधे नहीं की जा सकती। PTI DPT AKY

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