पासपोर्ट रखने और विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न अंग: दिल्ली उच्च न्यायालय

नई दिल्ली, 27 फरवरी (पीटीआई) — दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि पासपोर्ट रखने और विदेश यात्रा करने का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि जब भी किसी व्यक्ति के इस अधिकार पर प्राधिकारियों की कोई कार्रवाई प्रभाव डालती है, तो वह उचित, तर्कसंगत और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए।

न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव ने यह आदेश योगेश रहेजा, जो रहेजा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक हैं, का पासपोर्ट जब्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को रद्द करते हुए दिया। उन पर आरोप था कि पासपोर्ट नवीनीकरण के आवेदन के समय उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक एफआईआर लंबित होने की जानकारी नहीं दी।

याचिकाकर्ता का पासपोर्ट 17 जनवरी 2025 को जब्त करने का आदेश पारित किया गया था। इस निर्णय के खिलाफ उनकी अपील 25 मार्च 2025 को अपीलीय प्राधिकारी ने खारिज कर दी थी।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि विदेश मंत्रालय द्वारा 2019 में जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, केवल एफआईआर दर्ज होना पासपोर्ट जारी करने के संदर्भ में आपराधिक कार्यवाही लंबित होने के बराबर नहीं है, जब तक कि सक्षम न्यायालय द्वारा अपराध का संज्ञान न लिया गया हो।

अदालत ने कहा कि पासपोर्ट जब्त करने के लिए प्राधिकारियों द्वारा दिए गए कारण कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते। अदालत ने उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता ने अक्टूबर 2024 में पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, जबकि अपराध का संज्ञान फरवरी 2025 में लिया गया, जो कि जब्ती आदेश के एक महीने बाद की बात है।

अदालत ने कहा, “पासपोर्ट रखने और विदेश यात्रा करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अभिन्न अंग है। अतः इस अधिकार पर प्रभाव डालने वाली किसी भी राज्य कार्रवाई को तर्कसंगतता की कसौटी पर खरा उतरना होगा और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होना होगा।”

अदालत ने निष्कर्ष में कहा, “यह स्पष्ट है कि प्रतिवादियों द्वारा पारित निर्णय टिक नहीं सकता। अतः 17.01.2025 और 25.03.2025 के आदेश निरस्त किए जाते हैं।”

याचिकाकर्ता की ओर से करंजावाला एंड कंपनी के वरिष्ठ भागीदार संदीप कपूर ने पैरवी की। (पीटीआई)