भगिरथपुरा त्रासदी जांच: आयोग ने साक्ष्य दाखिल करने के लिए जनता को 1 अप्रैल तक का समय दिया

**PTI's Best Photos of the Week** Indore: A person shows a sample of the drinking water that is being collected following a diarrhoea outbreak caused by contaminated water, at Bhagirathpura area, in Indore, Madhya Pradesh, Friday, Jan. 2, 2026. (PTI Photo)(PTI01_02_2026_000070B) (PTI01_04_2026_000225B)

इंदौर, 3 मार्च (पीटीआई) इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कई लोगों की मौत की जांच कर रहा एक न्यायिक आयोग ने साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 1 अप्रैल कर दी है, अधिकारियों ने बताया।

उन्होंने कहा कि पहले अंतिम तिथि 28 फरवरी थी।

एक अधिकारी ने सोमवार को कहा, “कई लोगों, प्रभावित परिवारों और संगठनों द्वारा समय सीमा बढ़ाने के अनुरोध और अधिकतम तथ्यात्मक सामग्री उपलब्ध कराने के मद्देनजर आयोग ने अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने बताया कि इच्छुक व्यक्ति और संगठन अब अपनी आपत्तियां, अभ्यावेदन, दस्तावेज या साक्ष्य 1 अप्रैल तक आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं।

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता के एकल सदस्यीय आयोग द्वारा भगिरथपुरा क्षेत्र में पेयजल दूषित होने के कारणों, जनहानि और लोगों पर चिकित्सकीय प्रभाव, प्रशासनिक चूक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई तथा सुधारात्मक उपायों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों ने बताया कि भगिरथपुरा में पेयजल दूषण से संबंधित शिकायतें, मरीजों के चिकित्सकीय अभिलेख, मृत्यु प्रमाण पत्र, पेयजल पाइपलाइनों में रिसाव और सीवेज के मिश्रण से संबंधित फोटो और वीडियो, जल आपूर्ति कार्यों के निविदा दस्तावेज, कार्य आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट भी आयोग को प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

दिसंबर के अंतिम सप्ताह में भगिरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण उल्टी और दस्त का प्रकोप फैल गया था।

जहां निवासियों और कांग्रेस ने दावा किया है कि प्रकोप में 36 लोगों की मौत हुई, वहीं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला द्वारा विधानसभा में दी गई संख्या 22 है। पीटीआई एचडब्ल्यूपी लाल बीएनएम अरु

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