मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अल-फलाह चेयरमैन जावेद सिद्दीकी को दिल्ली कोर्ट से अंतरिम जमानत

नई दिल्ली, 8 मार्च (पीटीआई) — दिल्ली की एक अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में Jawed Siddiqui को दो सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है ताकि वह अपनी पत्नी की देखभाल कर सकें, जो स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर का इलाज करा रही हैं।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश Sheetal Chaudhary Pradhan ने शनिवार को सिद्दीकी को यह राहत देते हुए कहा कि उनकी पत्नी कीमोथेरेपी ले रही हैं और इलाज के दौरान उन्हें सहारे की आवश्यकता है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, “मौजूदा सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मेरा मानना है कि आवेदक/आरोपी को अंतरिम जमानत दी जानी चाहिए, क्योंकि उसकी पत्नी अस्वस्थ हैं।”

अदालत ने कहा कि सिद्दीकी की पत्नी दिल्ली के एक अस्पताल में कीमोथेरेपी करवा रही हैं और रिकॉर्ड पर रखे गए मेडिकल दस्तावेजों को Enforcement Directorate ने भी विवादित नहीं किया है।

अदालत ने यह भी कहा कि दंपति के तीनों बच्चे United Arab Emirates में पढ़ रहे हैं और भारत नहीं आ पा रहे हैं, जिससे महिला के पास तत्काल पारिवारिक सहारा नहीं है।

अदालत ने कहा, “आरोपी की पत्नी को देखभाल और सहयोग की आवश्यकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह भी तथ्य है कि उनके पास परिवार या बच्चे नहीं हैं और केवल उनके पति यानी आरोपी ही उन्हें सहारा दे सकते हैं।”

सिद्दीकी को Prevention of Money Laundering Act (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। यह मामला Al Falah Charitable Trust द्वारा संचालित संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।

अदालत ने उन्हें दो सप्ताह की अंतरिम जमानत व्यक्तिगत मुचलका और एक-एक लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने की शर्त पर दी।

अदालत ने सिद्दीकी को निर्देश दिया कि वह बिना अनुमति Delhi NCR से बाहर नहीं जाएंगे, अपना मोबाइल फोन सक्रिय रखेंगे, पासपोर्ट जमा करेंगे और रिहाई के दौरान गवाहों या शिकायतकर्ता से संपर्क नहीं करेंगे।

Enforcement Directorate ने जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि सिद्दीकी गंभीर अपराधों में शामिल हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि अदालत ने कहा कि आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है और अब तक फरार होने की कोशिश नहीं की है।

5 फरवरी को एजेंसी ने एक निजी विश्वविद्यालय के संचालन में कथित अनियमितताओं को लेकर जालसाजी के आरोप में सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। इससे पहले उन्हें 31 जनवरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

ईडी की जांच Delhi Police Crime Branch द्वारा दर्ज दो एफआईआर से शुरू हुई, जिनमें आरोप लगाया गया कि Al Falah University ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए झूठा NAAC मान्यता और University Grants Commission (यूजीसी) की मान्यता होने का दावा किया।

ईडी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये कमाए और छात्रों से एकत्र धन को व्यक्तिगत उपयोग के लिए डायवर्ट किया।

इस विश्वविद्यालय का नाम एक ‘व्हाइट-कॉलर टेरर’ जांच में भी सामने आया था, जिसमें इससे जुड़े दो डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था। एक अन्य डॉक्टर Umar-un-Nabi, जो इसके अस्पताल से जुड़ा था, 10 नवंबर को Red Fort के बाहर हुए विस्फोट में आत्मघाती हमलावर के रूप में पहचाना गया था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी।

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