
न्यूयॉर्क/वॉशिंगटन, 11 मार्च (पीटीआई) व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष के बीच ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने भारत को समुद्र में जहाजों पर पहले से मौजूद रूसी तेल को “स्वीकार” करने की “अस्थायी अनुमति” दी है और यह अल्पकालिक कदम मॉस्को को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं देगा।
लेविट ने मंगलवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस वार्ता में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ने “यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि भारत में हमारे सहयोगी अच्छे भागीदार रहे हैं और पहले प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना बंद कर चुके हैं।”
उन्होंने कहा, “इसलिए जब हम ईरानियों के कारण दुनिया भर में तेल आपूर्ति के इस अस्थायी अंतर को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं, तब हमने उन्हें (भारत को) उस रूसी तेल को स्वीकार करने की अस्थायी अनुमति दी है। और यह रूसी तेल पहले से ही समुद्र में था। यह पहले से ही पानी में था। इसलिए यह अल्पकालिक उपाय है और हमें नहीं लगता कि इससे इस समय रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ मिलेगा।”
लेविट पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष की पृष्ठभूमि में भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अमेरिका द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने से जुड़े सवाल का जवाब दे रही थीं।
ईरान के साथ संघर्ष के बीच अमेरिका ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट जारी कर रहा है।
बेसेंट ने कहा था, “राष्ट्रपति ट्रंप की ऊर्जा नीति के परिणामस्वरूप तेल और गैस उत्पादन अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक बाजार में तेल का प्रवाह जारी रखने के लिए ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने हेतु 30 दिन की अस्थायी छूट जारी कर रहा है।”
उन्होंने कहा था कि यह “जानबूझकर अल्पकालिक उपाय” रूसी सरकार को कोई महत्वपूर्ण वित्तीय लाभ नहीं देगा क्योंकि यह केवल समुद्र में पहले से फंसे तेल से जुड़े लेनदेन को अधिकृत करता है।
बेसेंट ने कहा था, “भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक आवश्यक साझेदार है और हमें पूरी उम्मीद है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। यह अस्थायी उपाय वैश्विक ऊर्जा को बंधक बनाने की ईरान की कोशिश से पैदा हुए दबाव को कम करेगा।”
ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया था और उनके प्रशासन ने कहा था कि नई दिल्ली की खरीद यूक्रेन के खिलाफ रूस की युद्ध मशीन को ईंधन दे रही है।
पिछले महीने अमेरिका और भारत ने घोषणा की थी कि उन्होंने व्यापार पर एक अंतरिम समझौते के लिए एक ढांचा तैयार किया है और ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर नई दिल्ली पर लगाए गए 25 प्रतिशत शुल्क हटा दिए, यह उल्लेख करते हुए कि उसने मॉस्को से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऊर्जा आयात रोकने और अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।
ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने पिछले शुक्रवार को एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि अमेरिका “भारत में अपने मित्रों को अनुमति दे रहा है” कि वे दक्षिणी एशिया के आसपास जहाजों पर पहले से मौजूद रूसी तेल को लें, उसे परिष्कृत करें और आपूर्ति बनाए रखने तथा ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच दबाव कम करने के लिए जल्दी बाजार में भेजें।
राइट ने कहा था, “हमने तेल की कीमतों को नीचे रखने में मदद के लिए अल्पकालिक उपाय लागू किए हैं। हम भारत में अपने मित्रों को अनुमति दे रहे हैं कि वे पहले से जहाजों पर मौजूद तेल लें, उसे परिष्कृत करें और उन बैरल को जल्दी बाजार में पहुंचाएं। आपूर्ति को प्रवाहित रखने और दबाव कम करने का यह एक व्यावहारिक तरीका है।”
एबीसी न्यूज लाइव को दिए एक साक्षात्कार में राइट ने कहा था कि दीर्घकालिक तेल आपूर्ति “प्रचुर मात्रा में” है और उसके बारे में कोई चिंता नहीं है, लेकिन अल्पकाल में बाजार में तेल पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, “लेकिन जैसे ही होरमुज़ जलडमरूमध्य से निकलने वाली बाधाओं के कारण तेल की कीमतें थोड़ी बढ़ती हैं, हम एक अल्पकालिक कदम उठा रहे हैं और कह रहे हैं कि दक्षिणी एशिया के आसपास जो रूसी तेल का तैरता हुआ भंडार है, उसे उपयोग में लाया जाए। चीन ने उसे रोक रखा है, चीन अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, इसलिए बहुत सा तेल वहीं पड़ा हुआ है। हमने भारत में अपने मित्रों से संपर्क किया और कहा, ‘वह तेल खरीदिए और अपनी रिफाइनरियों में ले जाइए।’ इससे तुरंत भारतीय रिफाइनरियों में संग्रहित तेल पहुंचता है और दुनिया भर की अन्य रिफाइनरियों पर दबाव कम होता है क्योंकि वे उस बाजार में अब भारतीयों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर रही होंगी।”
उन्होंने कहा, “ऐसे कई उपाय हैं जो अल्पकालिक और अस्थायी हैं। रूस के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं है। यह केवल बहुत ही संक्षिप्त समय के लिए नीति में बदलाव है ताकि तेल की कीमतों को कुछ हद तक कम रखा जा सके।”
राइट ने यह भी कहा था कि उन्होंने और बेसेंट ने भारत के अधिकारियों से जलमार्गों पर तैर रहे रूसी तेल को खरीदने, जो चीनी रिफाइनरियों में उतारे जाने की प्रतीक्षा कर रहा है, और उसे भारतीय रिफाइनरियों तक ले जाने के बारे में बात की है ताकि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच तेल की कमी और कीमतों में वृद्धि को लेकर चिंताओं को “कम” किया जा सके।
राइट ने रविवार को सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “रूस के प्रति संयुक्त राज्य अमेरिका की नीति में बिल्कुल भी बदलाव नहीं हुआ है। भारत इस बात को बहुत स्पष्ट रूप से समझता है।”
जब उनसे पूछा गया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई 30 दिन की छूट क्या अल्पकाल में ट्रंप प्रशासन के रूस को अलग-थलग करने के लक्ष्य को कमजोर कर रही है, तो राइट ने कहा, “ऐसा नहीं है।” उन्होंने कहा कि भारत ने लगभग सभी रूसी तेल आयात “प्रतिस्थापित” कर दिए हैं और अमेरिका, वेनेजुएला तथा अन्य देशों से अपने आयात बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा, “इस पूरे मामले में भारत एक शानदार साझेदार रहा है। लेकिन मैंने भी भारतीयों को फोन किया और ट्रेजरी सचिव बेसेंट ने भी किया और कहा, ‘देखिए, बहुत सारा तेल चीनी रिफाइनरियों में उतरने का इंतजार करते हुए तैर रहा है।’”
उन्होंने कहा, “उसे वहां छह सप्ताह तक इंतजार कराने के बजाय क्यों न हम उसे आगे लाएं, उसे भारतीय रिफाइनरियों में पहुंचाएं और तेल की कमी के इस डर को कम करें, कीमतों में उछाल और बाजार में दिख रही चिंताओं को कम करें। यह केवल एक व्यावहारिक प्रयास है जिसकी अवधि बहुत छोटी है। रूस के प्रति नीति में कोई बदलाव नहीं है।” पीटीआई वाईएएस आरसी
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