नई दिल्ली, 12 मार्च (भाषा)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की विचारधारा को बढ़ावा देने में कथित संलिप्तता के लिए बिहार में दो लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है।
उन्होंने कहा कि यह मामला पीएफआई द्वारा बिहार में गैरकानूनी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के माध्यम से शांति और धार्मिक सद्भाव को बाधित करने की साजिश से संबंधित है।
बुधवार को पटना में एक विशेष एनआईए अदालत में दायर पूरक आरोप पत्र के साथ, मामले में गिरफ्तार और आरोपित व्यक्तियों की कुल संख्या 20 हो गई है।
एन. आई. ए. ने जाँच के दौरान पाया कि अभियुक्त महबूब आलम उर्फ महबूब आलम नदवी (पी. एफ. आई., बिहार के अध्यक्ष) और शमीम अख्तर (पी. एफ. आई., बिहार के उपाध्यक्ष) साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे।
एनआईए द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि पूरी साजिश का उद्देश्य आतंक का माहौल बनाना और धार्मिक शत्रुता फैलाना था, भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए पीएफआई की विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए आपराधिक बल के उपयोग को उचित ठहराना था, जैसा कि संगठन के दृष्टि दस्तावेज-‘भारत 2047 भारत में इस्लाम के शासन की ओर, आंतरिक दस्तावेजः प्रसार के लिए नहीं’ में परिकल्पना की गई थी।
जांच एजेंसी, जिसने जुलाई 2022 में बिहार पुलिस से मामला अपने हाथ में लिया था, ने आगे जांच के दौरान पाया कि महबूब और शमीम पीएफआई कैडरों की भर्ती और प्रशिक्षण में लगे हुए थे।
बयान में कहा गया है कि सह-आरोपियों के साथ, वे अहमद पैलेस, फुलवारी शरीफ, पटना में आयोजित पीएफआई की बैठकों/प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल थे।
एनआईए ने कहा कि स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज करने के समय अहमद पैलेस से पीएफआई के दृष्टि दस्तावेज को जब्त कर लिया था। पीटीआई एकेवी केवीके केवीके
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