सीएम योगी आदित्यनाथ ने भर्ती बोर्डों को किसी भी समुदाय पर आपत्तिजनक टिप्पणी से बचने का निर्देश दिया

**EDS: THIRD PARTY IMAGE** In this image received on March 13, 2026, Defence Minister Rajnath Singh, Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath and others during the inaugural ceremony of the new Green Corridor in Lucknow. (Handout via PTI Photo) (PTI03_13_2026_000247B)

लखनऊ, 15 मार्च (पीटीआई)। Yogi Adityanath ने रविवार को सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति, जाति, धर्म या समुदाय की गरिमा और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ कोई भी आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। राज्य सरकार ने एक बयान में यह जानकारी दी।

बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सभी भर्ती बोर्डों के अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे किसी भी व्यक्ति, जाति, पंथ या समुदाय की गरिमा या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों से बचें। साथ ही इन निर्देशों को प्रश्नपत्र तैयार करने वाले सभी पेपर सेटर्स तक भी पहुंचाया जाए।

आदित्यनाथ ने कहा कि जो लोग बार-बार ऐसी गलती करते हैं, उन्हें तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यह प्रावधान पेपर सेटर्स के साथ किए जाने वाले समझौता ज्ञापनों (MoU) का भी हिस्सा बनाया जाए।

मुख्यमंत्री के ये निर्देश उस विवाद के एक दिन बाद आए हैं, जब Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board द्वारा आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछे गए एक सवाल पर विवाद खड़ा हो गया था।

परीक्षा में पूछा गया था — “अवसर के अनुसार बदल जाने वाला व्यक्ति कौन होता है?” इसके विकल्पों में “पंडित” भी शामिल था, जिस पर आपत्ति जताई गई।

यह सवाल 14 मार्च को आयोजित लिखित परीक्षा के हिंदी सेक्शन में आया था, जो सब-इंस्पेक्टर (सिविल पुलिस) और समकक्ष पदों की भर्ती के लिए आयोजित की गई थी।

इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तब बढ़ गया जब उत्तर प्रदेश भाजपा के सचिव Abhijat Mishra ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रश्न को तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि “पंडित” शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करना ब्राह्मण समुदाय की भावनाओं को आहत करता है।

मिश्रा ने कहा कि अवसर के अनुसार बदलने वाले व्यक्ति का सही अर्थ “अवसरवादी” होता है, जबकि “पंडित” शब्द ज्ञान और धार्मिक सम्मान से जुड़ा है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब विपक्षी दल पहले ही राज्य की भाजपा सरकार पर ब्राह्मण विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में Swami Avimukteshwaranand Saraswati के साथ Magh Mela के दौरान कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी विवाद हुआ था।

इसी बीच Uttar Pradesh Police Recruitment and Promotion Board ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। बोर्ड ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि वायरल हो रहे इस विशेष प्रश्न की जांच कराई जा रही है।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ा प्रोटोकॉल लागू किया जाता है और बोर्ड स्तर पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को प्रश्नपत्र तक पहुंच नहीं दी जाती।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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