
नई दिल्ली, 29 मार्च (पीटीआई) केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने रविवार को कहा कि पेट के आसपास जमा चर्बी (एब्डॉमिनल या सेंट्रल ओबेसिटी) सामान्य मोटापे की तुलना में अधिक बड़ा जोखिम कारक है, खासकर भारतीय संदर्भ में, जहां पतले-दुबले दिखने वाले लोगों में भी अक्सर अधिक विसरल फैट पाया जाता है।
मंत्री ने कहा कि हालांकि पुरुषों और महिलाओं दोनों में सामान्य मोटापा बढ़ रहा है, लेकिन पेट के मोटापे की व्यापकता असमान रूप से अधिक है और यह कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम का एक स्वतंत्र निर्धारक बनता है।
उन्होंने ‘Advances in Obesity and Lipid Management in CVD’ नामक पुस्तक के लोकार्पण के दौरान कहा, “पेट के आसपास विसरल फैट की मौजूदगी, भले ही सामान्य मोटापा न हो, गंभीर चिकित्सीय प्रभाव डालती है और इसके लिए समय पर पहचान और लक्षित हस्तक्षेप जरूरी है।”
मंत्री ने युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज और हृदय संबंधी घटनाओं सहित मेटाबोलिक विकारों की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई, जो बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतों और कम शारीरिक गतिविधि को दर्शाती हैं।
भारत में 2050 तक मोटापे के मामलों में तेज वृद्धि के अनुमान का जिक्र करते हुए सिंह ने जागरूकता बढ़ाने, समय रहते जांच और निवारक स्वास्थ्य उपायों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि दीर्घकालिक स्वास्थ्य और आर्थिक जोखिमों को कम किया जा सके।
