
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (भाषा)। दिल्ली कांग्रेस ने बुधवार को एसआईआर कवायद पर अन्य चिंताओं के साथ-साथ पार्टी द्वारा नियुक्त बूथ स्तर के एजेंटों को मतदाता विवरण प्रमाणित करने की अनुमति देने में “कानूनी और प्रक्रियात्मक जोखिमों” पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सी. ई. ओ.) को लिखे एक पत्र में पार्टी ने सत्यापन जिम्मेदारियों, पारदर्शिता और संदर्भ के रूप में पिछली मतदाता सूचियों के उपयोग से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला।
दिल्ली पार्टी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था-जहां बूथ स्तर के एजेंट (बीएलए) प्रतिदिन प्रति बूथ 50 भरे हुए गणना फॉर्म एकत्र कर सकते हैं और उन्हें अपनी शुद्धता को प्रमाणित करने वाले एक अंडरटेकिंग के साथ जमा कर सकते हैं-न तो व्यावहारिक है और न ही कानूनी रूप से उपयुक्त है।
“मतदाता आवेदन विवरण का सत्यापन बूथ स्तर के अधिकारियों, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों जैसे चुनाव अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी है। राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले बी. एल. ए. से इस तरह के विवरणों को प्रमाणित करने की उम्मीद करने से आयोग की जिम्मेदारी पार्टियों पर स्थानांतरित हो सकती है और इससे टालने योग्य विवाद हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बी. एल. ए. को इस तरह की जिम्मेदारियां सौंपने से “भ्रम, संभावित दुरुपयोग और उनके नियंत्रण से परे त्रुटियों के लिए संभावित दायित्व” पैदा हो सकता है।
पार्टी ने आधार दस्तावेज के रूप में 2002 की मतदाता सूची के कथित उपयोग पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया कि परिसीमन के बाद निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं में बड़े बदलाव हुए हैं। यादव ने कहा, “2002 और वर्तमान निर्वाचन क्षेत्रों के बीच उचित क्षेत्रवार मानचित्रण के बिना, मतदाता नामों का सटीक पता लगाना बेहद मुश्किल होगा”, यादव ने सीईओ से मुद्रित और डिजिटल दोनों प्रारूपों में 2002 की सूची का निर्वाचन क्षेत्रवार विवरण प्रदान करने का आग्रह किया।
कांग्रेस ने मतदाता पहचान में सहायता के लिए अंतिम रूप देने के बाद फ्रीज की गई फोटो मतदाता सूची की आपूर्ति की मांग की। पीटीआई एमएसजे पीआरके
वर्गः ब्रेकिंग न्यूज एसईओ Tag: #swadesi, #News, दिल्ली कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया में ‘कानूनी जोखिम’ को हरी झंडी दिखाई, CEO से मांगी स्पष्टता
