संरक्षण के लिए अनुकूल पुन: उपयोग और सार्वजनिक-निजी सहयोग जरूरी: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 27 जुलाई (पीटीआई) — एक नई रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि विरासत संरक्षण को न केवल एक “नैतिक कर्तव्य” बल्कि “रणनीतिक निवेश” के रूप में भी देखा जाना चाहिए। इसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल और डिजिटलीकरण के माध्यम से संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई गई है।

PHD चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) और KPMG इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह रिपोर्ट ‘बिल्डिंग पब्लिक-प्राइवेट सिनर्जीज़ फॉर हेरिटेज कंसर्वेशन’ शीर्षक से गुजरात के वडोदरा में लक्स्मी विलास पैलेस परिसर में 25 जुलाई को आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय विरासत पर्यटन सम्मेलन में जारी की गई।

पर्यटन, संरक्षण और उद्योग के विशेषज्ञों ने इस सम्मेलन में भारत की समृद्ध विरासत का आर्थिक पुनरुद्धार, सामुदायिक विकास और सांस्कृतिक निरंतरता के लिए उपयोग करने पर चर्चा की।

28 पृष्ठों की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विरासत संरक्षण से देश की सांस्कृतिक स्थलों को “स्थैतिक स्मारकों” से जीवंत और पहचान के प्रतीक में बदला जाना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा और समृद्धि प्रदान करें। इस रिपोर्ट में भारत के विभिन्न हिस्सों में सफल संरक्षण परियोजनाओं के साथ-साथ यूके, स्पेन, इटली और अन्य देशों के प्रसिद्ध संरक्षण मॉडल का भी उल्लेख किया गया है।

भारत में विरासत संरक्षण “अपने निर्णायक क्षण” पर है, और इसके आस-पास का ‘सांस्कृतिक परिदृश्य’ साइट की व्याख्या और निर्मित विरासत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए यह इसका अभिन्न अंग माना जाता है। यह इतिहास और संस्कृति की सेवा करते हुए समय-समय पर संरक्षण आवश्यक बनाता है।

रिपोर्ट में विरासत भवनों को कैफे, संग्रहालय, गैलरी या अन्य सांस्कृतिक स्थानों के रूप में अनुकूल पुन: उपयोग की सलाह दी गई है, साथ ही सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से तालमेल बनाने का उदाहरण उत्तर प्रदेश से दिया गया है।

साथ ही, रिपोर्ट में कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत फंडिंग की भी सिफारिश की गई है, जिसे सामुदायिक पहुंच के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि बेहतर परिणाम मिल सकें।

रिपोर्ट में प्रौद्योगिकी की भूमिका को स्वीकार करते हुए संवर्धित वास्तविकता (AR) और आभासी वास्तविकता (VR) का उपयोग कथावाचन के लिए करने तथा स्मार्ट प्रबंधन उपकरणों के जरिए आगंतुक विश्लेषण और जलवायु-संवेदनशील निगरानी करने का सुझाव दिया गया है।

डिजिटल संरक्षण के क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देते हुए यह कहा गया है कि विशेष तौर पर जलवायु खतरों या मानवीय संघर्ष के शिकार स्थलों का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और प्रचार होना चाहिए।

राज्य और निजी फंड को मिला कर धन उपलब्धता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, जिससे एकल फंड स्रोत पर निर्भरता कम होगी, संसाधनों और विशेषज्ञता तक पहुंच बढ़ेगी, और संरक्षण प्रयासों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होगी।

जैसे-जैसे यात्रियों की इच्छा सच्चे और समग्र अनुभव की ओर बढ़ रही है, विरासत पर्यटन को सांस्कृतिक पहचान, सामुदायिक सशक्तिकरण और क्षेत्रीय ब्रांडिंग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है। भारत, अपनी विशाल धरोहरों के संग्रह, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों, ऐतिहासिक नगरों, महलों, किलों और अमूर्त परंपराओं के कारण इस क्षेत्र में अग्रणी होने की अनूठी स्थिति में है।

ताजमहल, लाल किला, हुमायूँ का मकबरा, नालंदा प्राचीन विश्वविद्यालय के खंडहर, प्राचीन मंदिर, मध्ययुगीन मकबरे और औपनिवेशिक काल के संरचनाएं भारत की प्रमुख धरोहर स्थल हैं जो यात्रियों में विस्मय और रूचि जगाते हैं।

भारत सरकार, पर्यटन मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट (2022) के अनुसार, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन भारत की समग्र पर्यटन अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण और विकसित होता हुआ हिस्सा है, जिसकी वृद्धि घरेलू मांग और वैश्विक रुचि से प्रेरित है।

2024 की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि 2033 तक भारत का विरासत पर्यटन बाजार 57.14 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक तथा अनुभवात्मक यात्रा में वैश्विक रुचि की वजह से बढ़ेगा।

रिपोर्ट में विरासत संरक्षण के समक्ष चुनौतियां भी बताई गई हैं, जैसे अपर्याप्त धनराशि जो उपेक्षा, क्षरण और विरासत स्थलों के नुकसान का कारण बनती है; तकनीकी विशेषज्ञता की कमी; समुदाय की सहभागिता का अभाव; और रख-रखाव में कठिनाइयां। इसके अतिरिक्त, विरासत परियोजनाएं जटिल और बहुआयामी होती हैं, जिससे प्रभावी संरक्षण रणनीतियाँ विकसित करना चुनौतीपूर्ण होता है।

इस प्रकार, रिपोर्ट सार्वजनिक-निजी साझेदारी, नवोन्मेषी अनुकूल पुन: उपयोग, तकनीकी प्रगति और सतत वित्तपोषण के संयोजन द्वारा भारत की अमूल्य विरासत को वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की वकालत करती है।

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