पोर्ट ब्लेयर, 25 जुलाई (PTI) — अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के सांसद विष्णु पड़ा राय ने ‘स्थानीय प्रमाण पत्र’ (Local Certificate) प्रणाली के लिए वैधानिक ढांचे (Statutory Framework) की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
1984 में गृह मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक निर्देश के तहत ‘स्थानीय प्रमाण पत्र’ का प्रावधान लागू किया गया था, जो द्वीप में नौकरियों और उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक दस्तावेज था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में अपने फैसले (UOI बनाम संजय पंत) में वैधानिक समर्थन के अभाव में इस प्रावधान को ख़ारिज कर दिया, जिससे द्वीपवासियों को स्थानीय अधिवास आधारित आरक्षण का कानूनी संरक्षण नहीं मिल पाया।
इस संबंध में, भाजपा सांसद ने 22 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री को एक पत्र लिखकर याद दिलाया कि बिना कानूनी समर्थन के ‘स्थानीय प्रमाण पत्र’ प्रणाली से स्थानीय युवाओं, खासकर दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों के युवाओं के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने लद्दाख निवासी प्रमाण पत्र आदेश, 2021 (Ladakh Resident Certificate Order, 2021) का हवाला देते हुए कहा कि इसमें गृह मंत्रालय की स्वीकृति से ‘लद्दाख निवासी’ की परिभाषा तय की गई और सार्वजनिक सेवा में आरक्षण को वैधानीक आधार मिला।
राय ने शाह से अपील की कि अंडमान और निकोबार के लिए भी इसी तरह के कदम उठाए जाएं ताकि समानता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने लिखा, “मैं आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ कि स्थानीय प्रमाण पत्र एक उचित कानूनी ढांचे के तहत, अंडमान निकोबार द्वीप समूह के लिए ‘स्थानीय’ की वैधानिक परिभाषा अनुच्छेद 16(4) के तहत तय हो और स्थानीय निवासियों को सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण या प्राथमिकता दी जाए।”
सांसद ने ज़ोर देकर कहा कि इससे द्वीपवासियों को बड़ी राहत मिलेगी और स्थानीय रोजगार संरक्षण के मामले में अंडमान-निकोबार को लद्दाख के समान दर्जा प्राप्त होगा।
— PTI SN SN RG
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