ASI ने लाओस के मंदिर और मालदीव की मस्जिद में संरक्षण कार्य किए: सरकार ने लोकसभा में बताया

नई दिल्ली, 18 अगस्त (पीटीआई) – एशियाई देशों के विभिन्न सांस्कृतिक स्थलों में पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (ASI) ने संरक्षण और पुनरुद्धार कार्य किए हैं। इनमें लाओस के वाट फू मंदिर, म्यांमार के बागान में भूकंप प्रभावित मंदिर और पगोडा, तथा मालदीव की फ्रिडा मस्जिद शामिल हैं। यह जानकारी सोमवार को लोकसभा में केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने लिखित रूप में दी।

उन्होंने बताया कि ASI ने ये कार्य विदेश मंत्रालय के सहयोग से किए हैं।

मंत्री ने कहा कि ASI ने इन देशों में कई अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के संरक्षण कार्य किए हैं, जैसे वियतनाम के माई सोन मंदिर और नेहन टॉवर, कंबोडिया के प्रेह विहेर और ता प्रोहम।

शेखावत ने बताया कि “बृहत्तर भारत नीति” के तहत भारत दक्षिणपूर्व एशिया में अपनी सांस्कृतिक प्रभाव को हाइलाइट कर रहा है, जो ऐतिहासिक संबंधों के माध्यम से सांझा विरासत को उजागर करता है।

उन्होंने कहा, “यह प्रभाव दक्षिणपूर्व एशिया भर में पाए जाने वाले संस्कृत शिलालेखों में स्पष्ट रूप से दिखता है, जो भारतीय संस्कृति, धर्म, कला और परंपराओं को दर्शाते हैं। हालांकि, कई शिलालेख अभी भी अध्ययन के लिए अपर्याप्त हैं।”

मंत्री ने कहा कि इस दृष्टिकोण के अनुरूप, प्राच्य शास्त्र, शिलालेख और मुद्रा विभाग ने ‘दक्षिणपूर्व एशियाई संस्कृत और पालि शिलालेख’ नामक परियोजना शुरू की है।

इस परियोजना का उद्देश्य इन शिलालेखों का व्यवस्थित रूप से दस्तावेजीकरण, विश्लेषण और व्याख्या करना है ताकि भारत और दक्षिणपूर्व एशिया के सांस्कृतिक संबंधों को उजागर किया जा सके।

2024 के नवंबर में नोएडा के इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हेरिटेज में आयोजित ‘इंग्रेव्ड इन स्टोन एंड मेटल: इंडियन इम्प्रिंट्स ऑन साउथईस्ट एशियन इंस्क्रिप्शन एंड कॉइन्स’ नामक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत और थाईलैंड के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया। यह दक्षिणपूर्व एशियाई शिलालेख और मुद्रा पर केंद्रित पहली प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठक थी।

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