बिहार: चुनाव आयोग ने 65 लाख हटाए गए मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए, INDIA ब्लॉक ने इसे ‘मसख़रा’ करार दिया

पटना, 18 अगस्त (पीटीआई) – चुनाव आयोग ने सोमवार को बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए करीब 65 लाख लोगों के नाम सार्वजनिक किए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, ये नाम बूथवार आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं और हर मतदान केंद्र पर प्रिंटआउट भी लगाया गया है।

बिहार के चीफ इलेक्टोरल अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने बताया कि 14 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के तहत 2025 के प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल, लेकिन 1 अगस्त के ड्राफ्ट से हटाए गए मतदाताओं के नाम व कारण (मृत्यु/स्थायी स्थानांतरण/अनुपस्थिति/दोहरे प्रविष्टि) बिहार के सभी जिला निर्वाचन अधिकारी और प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिए गए हैं।

ड्राफ्ट मतदाता सूची में 9 अगस्त को प्रकाशित 22.34 लाख नाम उन लोगों के थे जिन्हें मृत घोषित कर हटाया गया, जबकि 36.28 लाख नाम स्थायी रूप से स्थानांतरित बताकर हटाए गए हैं। इसके अलावा, 7.01 लाख का पता न चल पाने के कारण भी नाम मिटाए गए।

कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में SIR की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए दायर की गई हैं, जिसमें आरोप है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी।

चुनाव आयोग द्वारा प्रकाशित ‘ASD’ (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत) सूची पर विपक्षी दलों ने संदेह जताया है और इसे भाजपा नेतृत्व वाले NDA को मदद पहुंचाने की कोशिश बताया है।

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि सूची प्रकाशित करने का तरीका सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का मजाक उड़ाने जैसा है। वे एक समेकित राज्यव्यापी सूची की मांग करते रहे हैं जिसमें शामिल और हटाए गए दोनों नाम एक जगह हों। उन्होंने कहा कि बूथवार सूची से राजनीतिक दलों को मदद मिलेगी पर आम मतदाता के लिए यह असुविधाजनक है।

CPI(ML) लिबरेशन के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि चुनाव आयोग को गलत तरीके से हटाए गए नामों की जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें आगामी अंतिम मतदाता सूची में बिना शर्त पुनर्स्थापित करना चाहिए। उन्होंने एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कभी-कभी मृत घोषित व्यक्ति जीवित पाए गए हैं।

कुणाल ने तिवारी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग तर्कसंगत है तो समेकित ‘ASD’ सूची क्यों नहीं जारी कर रहा, जिससे राजनीतिक दल बेहतर तरीके से समस्याओं का पता लगा सकें। बिहार में 90,000 से अधिक मतदान बूथ हैं और बूथवार सूची से नाराज मतदाताओं की मदद करना कठिन होगा।

उन्होंने अंत में कहा कि चुनाव कार्यक्रम लगभग एक महीने में घोषित होना है, और आयोग को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

‘ASD’ सूची में मतदाता का नाम, आयु, EPIC नंबर समेत 10 कॉलम होते हैं, साथ ही अंतिम कॉलम में ‘मृत’, ‘स्थानांतरित’ या ‘अनुपस्थित’ का उल्लेख होता है। इसके अलावा BLO द्वारा मिलने वाले व्यक्ति और हटाए गए नाम वाले व्यक्ति का संबंध भी विवरण में होता है।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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