मुजफ्फरपुर/पटना, 11 अगस्त (पीटीआई) – बिहार के मुजफ्फरपुर के जिला अधिकारी सुब्रत सेन, एसएसपी सुशील कुमार और विभिन्न वर्गों के लोगों ने सोमवार को स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसी दिन 1908 में मुजफ्फरपुर केंद्रीय जेल में उन्हें फांसी दी गई थी।
ब्रिटिश जज डगलस किंग्सफोर्ड की हत्या के प्रयास में बोस को फांसी की सजा सुनाई गई थी। अपने सहयोगी प्रफुल्ल चाकी के साथ बोस ने उस घोड़ा-गाड़ी पर बम फेंके थे जिसमें उन्हें लगा कि किंग्सफोर्ड सवार हैं, लेकिन इस हमले में दो ब्रिटिश महिलाओं की मौत हो गई थी।
अधिकारियों ने कंपनी बाग स्थित खुदीराम बोस स्मारक में लगी उनकी प्रतिमा पर भी माल्यार्पण किया। यही वह स्थान है जहां बम हमला किया गया था।
पश्चिम मिदनापुर (पश्चिम बंगाल) के हबीबपुर स्थित बोस के पैतृक गांव से भी कई लोग केंद्रीय जेल के बाहर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
प्रफुल्ल चाकी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को गोली मार ली थी, जबकि बोस को गिरफ्तार किया गया, मुकदमा चला और फांसी दी गई।
राजधानी पटना में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान इसी दिन पटना सचिवालय के पास तिरंगा फहराने का प्रयास करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
11 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान पटना सचिवालय के पास झंडा फहराते समय ब्रिटिश सेना की गोलीबारी में सात लोग शहीद हो गए थे।
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