हांगझोउ, 16 दिसंबर (पीटीआई) — सत्र के अंतिम BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स की शुरुआत बुधवार से यहां होने जा रही है और भारतीय पुरुष युगल जोड़ी सत्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के सामने फॉर्म और मानसिक मजबूती की कड़ी परीक्षा होगी। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में उन्हें व्यापक रूप से ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ कहे जाने वाले समूह में रखा गया है।
इस शोपीस इवेंट में प्रत्येक वर्ग में वर्ल्ड टूर कैलेंडर में प्रदर्शन के आधार पर चुने गए शीर्ष आठ खिलाड़ी या जोड़ियां हिस्सा लेती हैं।
पूर्व विश्व नंबर एक रह चुके और फिलहाल विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर काबिज सत्विक और चिराग इस elite टूर्नामेंट में भारत के एकमात्र प्रतिनिधि हैं।
ग्रुप बी में शामिल एशियन गेम्स चैंपियन भारतीय जोड़ी का सामना कई ओलंपिक पदक विजेताओं से होगा।
वे अपने अभियान की शुरुआत चीन के लियांग वेई केंग और वांग चांग के खिलाफ करेंगे, जो पेरिस ओलंपिक के रजत पदक विजेता हैं। इसके बाद उनका मुकाबला इंडोनेशिया के फजर अल्फियान और मोहम्मद शोहिबुल फिकरी से होगा, जो अपनी तेज़ गति और आक्रामक खेल के लिए जाने जाते हैं।
शुक्रवार को अपने अंतिम ग्रुप मैच में सत्विक-चिराग का सामना अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी मलेशिया के आरोन चिया और सोह वूई यिक से होगा, जो पेरिस ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और टूर्नामेंट के दूसरे वरीयता प्राप्त जोड़ी हैं।
हेड-टू-हेड आंकड़े भी चुनौती की गंभीरता दर्शाते हैं। भारतीय जोड़ी का चीन की विश्व नंबर सात जोड़ी के खिलाफ रिकॉर्ड 3-7 का है। सितंबर में हांगकांग ओपन फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, हालांकि चीन मास्टर्स में हालिया भिड़ंत में सत्विक-चिराग विजयी रहे।
इंडोनेशियाई विश्व नंबर 11 जोड़ी के खिलाफ भी भारतीयों को ऑस्ट्रेलियन ओपन क्वार्टरफाइनल में अपने एकमात्र मुकाबले में हार झेलनी पड़ी थी। वहीं आरोन और सोह लंबे समय से उनके लिए कठिन प्रतिद्वंद्वी साबित होते रहे हैं।
प्रत्येक समूह से केवल शीर्ष दो जोड़ियां सेमीफाइनल में प्रवेश करेंगी, ऐसे में इस ड्रॉ में गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।
हालांकि इस वर्ष उन्हें कोई खिताब नहीं मिला है, लेकिन चोट के कारण ब्रेक के बाद वापसी करते हुए सत्विक और चिराग ने निरंतरता और जुझारूपन दिखाया है। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और हांगकांग ओपन व चीन मास्टर्स में उपविजेता रहे।
इसके अलावा, इस जोड़ी ने मलेशिया ओपन, इंडिया ओपन, सिंगापुर ओपन, चाइना ओपन और डेनमार्क ओपन के सेमीफाइनल तक का सफर तय किया।
सत्र के अंत में होने वाले इस टूर्नामेंट में भारत की मौजूदगी सीमित लेकिन प्रभावशाली रही है। पीवी सिंधु 2018 में महिला एकल खिताब जीतने वाली एकमात्र भारतीय हैं, जबकि सायना नेहवाल 2011 में फाइनल तक पहुंची थीं।
डबल्स में ज्वाला गुट्टा और वी. दिजू 2009 सुपर सीरीज फाइनल्स में मिक्स्ड डबल्स के फाइनलिस्ट रहे थे।
कठिन ड्रॉ के बावजूद बड़े मुकाबलों में सत्विक-चिराग का अनुभव भारतीय उम्मीदों को जीवित रखता है। हांगझोउ में दमदार प्रदर्शन उन्हें सत्र के अंतिम टूर्नामेंट में भारत का पहला पुरुष युगल खिताब दिला सकता है। पीटीआई ATK AM AM AM
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