नई दिल्ली, 19 अगस्त (PTI) – एक याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई है जिसमें दिल्ली में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास से जले हुए नकद नोट मिलने के मामले में उनके खिलाफ FIR दर्ज करने से इंकार करने के न्यायालय के अगस्त 7 के फैसले की समीक्षा मांगी गई है।
यह याचिका तीन वकीलों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा दायर की गई है, जिनका दावा है कि उन्हें FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस या सरकार के समक्ष कोई शिकायत नहीं दिखाने के आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
न्यायमूर्ति दिपंकर दत्ता और ए जी मसिह की पीठ ने कहा था कि, “याचिकाकर्ताओं ने कभी पुलिस के समक्ष FIR दर्ज कराने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया, और उन्होंने कोर्ट को भी गलत हलफनामा दिया।” इसी के कारण न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से गुरेज़ किया था।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता मैथ्यू जे नेडुम्पारा और अन्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में स्पष्ट रिकॉर्ड की गलती हुई है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है, जो न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करेगी।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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