नई दिल्ली, 21 अगस्त (PTI) – केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) श्रीनगर विशेष न्यायालय से 8 जम्मू और कश्मीर पुलिस कर्मियों की पुलिस रिमांड मांगेगा, जिन्हें दो साल पहले साथी पुलिस कांस्टेबल पर “निर्दयी और अमानवीय हिरासत प्रताड़ना” के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
इन आठ अधिकारियों को बुधवार रात विस्तृत पूछताछ के बाद हिरासत में लिया गया, और उनके खिलाफ आरोप तय करने के लिए आगे पूछताछ जारी रहेगी। कांस्टेबल खुर्शीद अहमद चोहान को आरोप है कि ड्रग तस्करों की मदद करने के संदेह में छह दिनों तक बेरहमी से प्रताड़ित किया गया।
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस एजाज अहमद नैको और अन्य पांच पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान, दो और पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्रताड़ना में सहयोग करने और जांच में अड़चन डालने के आरोप सामने आए।
डिप्टी एसपी नैको, सब-इंस्पेक्टर रियाज़ अहमद समेत छह अन्य आरोपियों को हत्या के प्रयास और आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पीड़ित खुर्शीद, जो बरामूला में तैनात था, को 17 फरवरी 2023 को नशीली दवाओं के मामले में कुपवाड़ा एसएसपी के यहां पूछताछ के लिए बुलाया गया था। वहां पहुंचने पर उसे संयुक्त पूछताछ केंद्र सौंप दिया गया, जहां उसे लोहे की छड़ें और लकड़ी के डंडों से पीटा गया, भारी बिजली के झटके दिए गए और उसकी जननांगों की बुरी तरह क्षति की गई, जैसा कि उसकी पत्नी की शिकायत में कहा गया है।
शिकायत में बताया गया कि 26 फरवरी 2023 को खुर्शीद के निजी अंग काट दिए गए और छह दिनों तक लोहे की छड़ें उसके निजी अंगों में डाली गईं। साथ ही, उसके गुदा में लाल मिर्च डालकर उसे पीटा गया और बिजली के झटके दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण को सीबीआई को सौंपते हुए कहा था कि खुर्शीद के घायल अंग अलग थैले में अस्पताल लाए गए, जो बेहद चिंताजनक है।
खुर्शीद की पत्नी ने बार-बार इंसाफ मांगा था क्योंकि अन्याय के कारण वह पीड़ित और अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुपवाड़ा एसएसपी इस प्रकरण में मूकदर्शक बना रहा।
सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश के दावों को खारिज किया कि चोटें खुर्शीद ने खुद लगाई हैं।
न्यायालय ने कहा कि यह मामला पुलिस की बर्बरता का एक अनोखा उदाहरण है, जहां पीड़ित की जननांगों का पूरी तरह से निपटारा कर दिया गया और राज्य इसे छुपाने की कोशिश कर रहा है।
मेडिकल साक्ष्य ने स्पष्ट किया कि चोटें स्वयं लगाना असंभव हैं तथा आत्महत्या की थ्योरी गलत साबित होती है।
न्यायालय ने CBI को निर्देश दिया है कि वह संयुक्त पूछताछ केंद्र, कुपवाड़ा में सभी CCTV फुटेज, कर्मचारियों से पूछताछ, फोरेंसिक जांच और सभी प्रोटोकॉल तथा जांच प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि खुर्शीद को 17 फरवरी 2023 को बिना किसी निश्चित FIR के बुलाया गया था और पुलिस के दावे तथा FIR के बीच तथ्यात्मक विरोधाभास भी सामने आया है।
खुर्शीद ने उच्च न्यायालय में CBI जांच की मांग की थी, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लिया और जांच CBI को सौंपी।
सुप्रीम कोर्ट ने खुर्शीद को 50 लाख रुपये का मुआवजा भी दिए जाने का आदेश दिया, जो संबंधित अधिकारियों से वसूला जाएगा, जिनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी।
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