‘पूरी तरह अस्पष्ट’: वंतारा में रखे गए पालतू हाथियों को लौटाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

नई दिल्ली, 14 अगस्त (पीटीआई) – सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वंतारा (Vantara) में रखे पालतू हाथियों को लौटाने के लिए मॉनिटरिंग समिति गठित करने की मांग वाली एक याचिका को “पूरी तरह अस्पष्ट” करार दिया। वंतारा एक वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास केंद्र है, जहां वन्य प्राणियों को रखा जाता है।

न्यायमूर्ति पंकज मिटल और पी. बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता व अधिवक्ता सी. आर. जया सुकीन से कहा कि वे वंतारा पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन उसे पार्टी (प्रतिवादी) के रूप में शामिल नहीं किया है।

पीठ ने कहा, “आप उन पक्षों पर आरोप लगा रहे हैं जो यहां मौजूद नहीं हैं। आपने उन्हें प्रतिवादी नहीं बनाया है। आप उन्हें शामिल करें और फिर वापस आइए, तब हम देखेंगे।” अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को तय की और एक समान याचिका को भी इसके साथ टैग कर दिया।

यह याचिका पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के समक्ष जल्द सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेखित की गई थी।

याचिका में मॉनिटरिंग समिति की स्थापना कर पालतू हाथियों को उनके मालिकों को लौटाने, वंतारा से सभी वन्य जीवों और पक्षियों को “मुक्त कर जंगल में छोड़ने” की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि—

कानून और नियमों का उल्लंघन हुआ है।

राज्य प्रशासन विफल रहा, कुछ अधिकारी समझौता कर गए और कुछ को धमकी दी गई।

पालतू हाथियों को मंदिरों और उनके मालिकों से जबरन ले जाया गया।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई वन्य जीव व पक्षी, जिनमें कुछ लुप्तप्राय प्रजातियां भी शामिल हैं, वंतारा में “वन्यजीव बचाव और पुनर्वास” के नाम पर गुजरात लाए गए।

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