जस्टिस वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव पर कांग्रेस देगी समर्थन, उसके सांसद भी होंगे हस्ताक्षरकर्ता: जयराम रमेश

नई दिल्ली, 18 जुलाई (PTI) — कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लाए जा रहे प्रस्ताव पर पार्टी न केवल समर्थन देगी, बल्कि कांग्रेस के सांसद भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना द्वारा इस संबंध में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखने के बाद सांसदों के पास कोई विकल्प नहीं बचा।

PTI को दिए एक इंटरव्यू में जयराम रमेश ने कहा कि विपक्ष जस्टिस शेखर यादव के मामले को भी ज़ोरदार तरीके से उठाएगा, जिनके खिलाफ बीते दिसंबर में राज्यसभा में 55 विपक्षी सांसदों ने महाभियोग का प्रस्ताव दिया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक जनसभा में घृणा फैलाने वाला भाषण दिया था।

क्या है मामला?

मार्च महीने में दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जज जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने की घटना के बाद आउटहाउस से जली हुई नोटों की बोरियाँ बरामद हुईं। मामले में उन्होंने नकदी के बारे में अनभिज्ञता जताई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक समिति ने गवाहों की गवाही और जज के बयान के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया

इसके बाद तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा को हटाने की सिफारिश की। अब केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, जो 21 जुलाई से शुरू होगा।

क्या बोले जयराम रमेश?

उन्होंने कहा —

“संविधान का अनुच्छेद 124 स्पष्ट कहता है कि महाभियोग की प्रक्रिया सांसदों द्वारा शुरू होती है — लोकसभा में 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के माध्यम से। सरकार खुद इसे शुरू नहीं कर सकती।”

“हम इसे समर्थन दे रहे हैं, हमारे सांसद लोकसभा के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह अभी महाभियोग नहीं है, बल्कि 1968 के ‘जजेज़ (इंक्वायरी) अधिनियम’ के तहत लोकसभा अध्यक्ष द्वारा एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित करने की प्रक्रिया है।”

उन्होंने बताया कि समिति घटना की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद संसद के शीतकालीन सत्र में जज को हटाने के लिए प्रक्रिया शुरू होगी — पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में।

रमेश ने कहा कि जांच जरूरी है, क्योंकि यह कार्रवाई कोई राजनीतिक साजिश नहीं, बल्कि उच्चतम न्यायालय की एक इन-हाउस रिपोर्ट के आधार पर हो रही है।

जस्टिस शेखर यादव के मामले पर भी विपक्ष मुखर

जयराम रमेश ने बताया कि जस्टिस शेखर यादव ने अपने भाषण में संविधान और शपथ का उल्लंघन किया।

“सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ। मैंने राज्यसभा के सभापति से कई बार मुलाकात की लेकिन प्रस्ताव लंबित पड़ा है,” उन्होंने कहा।

रमेश ने सवाल उठाया कि सभापति या तो खुद उस प्रस्ताव को रोक रहे हैं या उनसे रुकवाया जा रहा है।

“हम कम से कम यह उम्मीद करते हैं कि एक समिति गठित हो जो जस्टिस यादव के व्यवहार की जांच करे।”

उधर, जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और उस इन-हाउस समिति की रिपोर्ट को रद्द करवाने की मांग की है, जिसमें उन्हें दोषी पाया गया। उन्होंने 8 मई को दिए गए उस सिफारिश पत्र को रद्द करने की भी मांग की है, जिसे तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजा था।

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