नई दिल्ली, 25 जुलाई (PTI) — दिल्ली की एक अदालत ने एक मजिस्ट्रेटीयल कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। यह मामला जनवरी 2022 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में एक पुलिस उप-निरीक्षक पर एक आवारा कुत्ते को डंडे से मारने का आरोप लगा था।
प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुकविंदर कौर ने कहा कि पुलिस उप-निरीक्षक रविंद्र को अपने औपचारिक दायित्वों के तहत पुलिस कर्मियों के लिए मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का लाभ नहीं मिल सकता क्योंकि “कुत्ते को पीटना उनके आधिकारिक कर्तव्य में नहीं आता।”
रविंद्र ने अगस्त 2023 में मजिस्ट्रेटीयल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। उन्होंने दावा किया कि कुत्ते ने उन्हें काटा था और वे आत्मरक्षा में कार्य कर रहे थे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है वह “चयनित और अपूर्ण” है।
18 जुलाई को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नोट किया कि पुलिस द्वारा की गई जांच संदिग्ध थी और ज्यादा प्रयास आरोपी पुलिसकर्मी को बचाने के लिए किए गए लग रहे थे। पुलिस ने कुत्ते का मेडिकल परीक्षण तक नहीं किया, जबकि आरोपी ने दावा किया था कि कुत्ते को कोई गंभीर चोट नहीं आई।
न्यायालय ने कहा कि “मजिस्ट्रेट के फैसले में कोई त्रुटि नहीं है, जिसमें कहा गया है कि पुलिस ने जांच के नाम पर पक्षपात किया और आरोपी पुलिसकर्मी को क्लीन चिट दे दी,” और यह कि कुत्ता पीड़ित था।
कोर्ट ने कहा कि प्रामाणिक जांच आवश्यक है, जिसमें वीडियो की सत्यता की पुष्टि, स्थानीय लोगों, गवाहों और उपचार करने वाले डॉक्टरों के बयानों की रिकॉर्डिंग, गवाहों की सुरक्षा और अपराध में प्रयुक्त हथियार की बरामदगी शामिल होगी।
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