सीमा पार आतंकवाद और यूके में खालिस्तानी गतिविधियों पर मोदी-स्टारमर वार्ता में हो सकती है चर्चा

नई दिल्ली, 22 जुलाई (PTI) — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष कीर स्टारमर के बीच गुरुवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में सीमा पार आतंकवाद, ब्रिटेन में सक्रिय खालिस्तान समर्थक तत्वों की गतिविधियां, और आर्थिक अपराध के आरोप में वांछित अरबपतियों के प्रत्यर्पण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

यह जानकारी मंगलवार को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी बुधवार को अपने दो देशों के दौरे के पहले चरण में लंदन के लिए रवाना होंगे, जहां भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। बाद में वह मालदीव जाएंगे।

सीमा पार आतंक और TRF का उल्लेख

मिस्री ने कहा, “प्रधानमंत्री की यह यात्रा आतंकवाद से निपटने की सामूहिक प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करने का अवसर है। हम सीमा पार से हो रहे आतंकवाद और उस पर तत्काल एवं सशक्त ढंग से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता पर चर्चा करेंगे।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में पुलवामा के पास हुए नृशंस आतंकी हमले में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की शाखा The Resistance Front (TRF) की भूमिका रही है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने TRF को ‘वैश्विक आतंकी संगठन’ घोषित किया है।

आर्थिक भगोड़ों के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी उठ सकता है

जब पत्रकारों ने विदेश सचिव से सवाल किया कि क्या विजय माल्या, नीरव मोदी और ललित मोदी जैसे आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया जाएगा, तो उन्होंने कहा:

“इन मामलों पर पहले भी वार्ताएं होती रही हैं। हमने इन भगोड़ों को भारत लाने के लिए निरंतर कोशिशें की हैं।”

  • नीरव मोदी 2 अरब डॉलर के पीएनबी घोटाले में वांछित हैं

  • विजय माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस के नाम पर 9,000 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के बाद 2016 में ब्रिटेन भाग गए थे

  • ललित मोदी पर मनी लॉन्ड्रिंग और FEMA कानून के उल्लंघन के आरोप हैं

यूके में खालिस्तानी गतिविधियों पर भारत की चिंता

विदेश सचिव ने यह भी संकेत दिया कि संयुक्त राजशाही में सक्रिय खालिस्तानी तत्वों का मुद्दा भी एजेंडे में रहेगा।

उन्होंने कहा,

“यूके में खालिस्तानी उग्रवादियों और उनसे जुड़े संगठनों की मौजूदगी को हम कई बार ब्रिटिश अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। यह सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि ब्रिटेन के सामाजिक एकता और कानून-व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय होना चाहिए।”

भारत-ब्रिटेन संबंधों की समीक्षा

मोडी और स्टारमर की यह बातचीत दोनों देशों के बीच 2021 में घोषित ‘समग्र रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) की समीक्षा और उसे आगे बढ़ाने का अवसर होगी।

यह प्रधानमंत्री मोदी की चौथी ब्रिटेन यात्रा होगी। वह 2015, 2018 और 2021 (COP26 शिखर सम्मेलन, ग्लासगो) में यूके जा चुके हैं।

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