दिल्ली सीएम ने दिल्ली विधानसभा में AAP के ‘फांसी घर’ दावे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी; शहीदों का अपमान बताया

नई दिल्ली, 6 अगस्त (PTI) — बुधवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में कथित ‘फांसी घर’ (फांसी का कमरा) के दावों को लेकर विस्तृत जांच और FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस संदिग्ध ‘फांसी घर’ के साइन बोर्ड को तुरंत हटा दिया जाना चाहिए।

विधानसभा के स्पीकर विजयेंद्र गुप्ता ने सदन को बताया कि यह संरचना, जिसे 2022 में उस समय के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ‘फांसी घर’ के तौर पर नवीनीकृत और उद्घाटित किया था, असल में रिकॉर्ड के अनुसार एक ‘टिफिन रूम’ था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व AAP सरकार द्वारा जो दावे किए गए, वे इतिहास का भ्रामक विकरण, राष्ट्रीय शहीदों का अपमान और जनता के भरोसे की धोखाधड़ी हैं। उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिना किसी दस्तावेज़ी साक्ष्य या ऐतिहासिक प्रमाण के विधानसभा परिसर के एक हिस्से को ‘फांसीघर’ घोषित कर जनता की सहानुभूति पाने के लिए राजनीतिक नाटक किया।

रेखा गुप्ता ने कहा, “केजरीवाल का हर कदम, पोशाक और बयान एक राजनीतिक उद्देश्य के तहत योजनाबद्ध था। ईमानदारी, देशभक्ति और बलिदान के बहाने लोगों को गुमराह किया गया। यह सब एक मंचित नाटक था।” उन्होंने ये भी कहा कि केजरीवाल के पास ‘ड्रामा और मनोविज्ञान’ की कई डिग्रियां हैं और उनके हर उपाय में कुछ न कुछ उद्देश्य छिपा होता है।

इतिहास के प्रमाणों के अनुसार, यह भवन 1912 में बना था और 1913 से 1926 तक ब्रिटिश काल के इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल के सत्रों का स्थल था।

मुख्यमंत्री ने स्पीकर और सदन से आग्रह किया कि ‘फांसीघर’ से संबंधित भ्रामक साइनेज को शीघ्र हटाया जाए, खासकर आगामी 24 और 25 अगस्त को दिल्ली में होने वाली ऑल इंडिया स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस से पहले, ताकि देशभर से आए गणमान्य अतिथियों के समक्ष विधानसभा की प्रतिष्ठा बनी रहे और गलत इतिहास प्रस्तुत न हो।

उन्होंने कहा कि इस ‘झूठे दावे’ को बढ़ावा देने पर लगभग 1 करोड़ रुपये टैक्सपेयर्स के पैसे खर्च किए गए, जिसे वापस लिया जाना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर विस्तृत जांच की जाए।

रेखा गुप्ता ने दोहराया कि केजरीवाल सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि जनता के विश्वास की खुली खलल है। हमारी सरकार सच उघाड़ने और इस संस्थान की ऐतिहासिक गरिमा को सच्चाई और ईमानदारी से बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब जिस हिस्से को ‘फांसीघर’ के रूप में गलत ढंग से दिखाया जा रहा है, वह ब्रिटिश अधिकारियों के सेवा के लिए बनाए गए प्राथमिकत: एक सर्विस सीढ़ी और टिफिन सुविधा के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

वास्तविक फांसीघर पुरानी दिल्ली की जेल में था, जो वर्तमान मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के स्थान पर था।

मुख्यमंत्री ने कहा, “इतिहास को गढ़ना न केवल जनता को गुमराह करता है बल्कि हमारे शहीदों के बलिदान का अपमान भी है। एक ऐसे संस्थान की दीवारों पर झूठ को अंकित करना जहाँ संविधान के अनुसार कानून बनाए जाते हैं, यह एक अपराधिक कार्य है।”

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