नई दिल्ली, 17 जुलाई (PTI) — दिल्ली की एक अदालत ने अपनी 14 वर्षीय सौतेली बेटी से बलात्कार कर उसे गर्भवती करने वाले व्यक्ति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने टिप्पणी की कि दोषी “समाज के लिए खतरा है” और इसे जितना संभव हो समाज से दूर रखना चाहिए।
जज का सख्त रुख
एडिशनल सेशंस जज अमित सहरावत ने कहा कि इस “निर्दयी अपराध” को देखते हुए दोषी के साथ “लोहे का हाथ” अपनाना आवश्यक था।
अदालत मामले में POCSO एक्ट की धारा 6 (गंभीर यौन शोषण) और बलात्कार के तहत सजा देने की दलीलों पर विचार कर रही थी।
कोर्ट का आदेश:
“सजा निर्धारित करते समय यह नहीं भूला जा सकता कि आरोपी ने नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार ही नहीं किया, बल्कि उसे करीब 18 सप्ताह तक गर्भ धारण करने के लिए भी मजबूर किया।”
न्यायाधीश ने कहा कि पीड़िता को जो मानसिक और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ी, वह बेहद असहनीय है और इस कारण अपराधी के लिए किसी भी प्रकार की रियायत का कोई स्थान नहीं है।
“यदि कोई व्यक्ति अपने ही परिवार के सदस्य — एक नाबालिग बच्ची — के साथ इतना घिनौना अपराध कर सकता है, तो वो समाज के लिए बड़ा खतरा है। यदि उसे समाज में वापस लाया गया, तो आसपास की अन्य बच्चियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसलिए, आरोपी को समाज से यथासंभव लंबे समय तक अलग रखा जाना चाहिए।”
क्या कहा कोर्ट ने मृत्युदंड पर?
अदालत ने मृत्युदंड देने से इंकार करते हुए कहा कि यह अपराध “समाज के समग्र हित” के विरुद्ध नहीं था।
हालांकि, अदालत ने फैसला सुनाया कि आरोपी को “आजीवन — जब तक वह जीवित है” — जेल में ही रहना होगा।
पीड़िता को राहत राशि
अदालत ने पीड़िता को मुआवज़े के तौर पर ₹16.5 लाख की राशि देने का आदेश भी दिया है, ताकि उसकी भविष्य की चिकित्सा, शिक्षा या पुनर्वास की व्यवस्था हो सके।
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