दिल्ली सरकार गोबर से ऊर्जा उत्पादन और ओखला में निर्माण-वन-nाश (C&D) अपशिष्ट रीसाइक्लिंग पर कार्य कर रही है

दिल्ली सरकार दो महत्वपूर्ण सतत अपशिष्ट प्रबंधन पहलों को आगे बढ़ा रही है: गाय के गोबर से ऊर्जा उत्पादन और ओखला लैंडफिल साइट पर नया निर्माण-वन नाश (C&D) अपशिष्ट रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित करना।

गोबर से ऊर्जा उत्पादन के लिए बायोगैस परियोजनाएं

  • मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में प्रशासन दिल्ली के 12,000 से अधिक डेयरी क्लस्टर्स के आसपास बायोगैस तथा बायो-सीएनजी संयंत्रों के निर्माण को प्राथमिकता दे रहा है, जहां प्रतिदिन हजारों टन गोबर उत्पन्न होता है। वर्तमान में यह अपशिष्ट बिना उचित निस्तारण के यमुना नदी में गंदगी फैलाता है।

  • मदनपुर खादर में स्थित बायोगैस संयंत्र जैसे स्थापित प्रोजेक्टों द्वारा डेयरी अपशिष्ट को ऊर्जा में परिवर्तित किया जा रहा है। अब इसी मॉडल को अन्य प्रमुख डेयरी कॉलोनी में भी लागू करने की योजना है।

  • विशेष ड्रेन और जमाव टैंक बनाए जा रहे हैं ताकि गोबर जल स्रोतों में न मिल सके। पूरे शहर में इस मॉडल को लागू करने के लिए लगभग ₹15 करोड़ की आवश्यकता है।

  • सरकार नए संयंत्रों के लिए भूमि की पहचान और निर्माण कार्य तेजी से कर रही है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना, हरित ऊर्जा उत्पन्न करना और यमुना की सफाई में सहयोग देना है।

  • केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की बायोगैस नीति के तहत गोबर आधारित छोटे संयंत्रों के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है, जिससे विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है।

ओखला में निर्माण-वन-नाश (C&D) अपशिष्ट रीसाइक्लिंग

  • ओखला लैंडफिल साइट पर एक नया संयंत्र बनाया जाना है, जिसका संचालन दिसंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है, जो प्रतिदिन 1,000 टन निर्माण-वन-नाश अपशिष्ट संसाधित करेगा।

  • यह संयंत्र 8 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा, जिसे बायोमाइनिंग द्वारा पुनः प्राप्त किया गया है। यहां से बनने वाली पुनर्नवीनीकृत सामग्रियां जैसे टाइल्स, ईंटें, ब्लॉक्स, इंटरलॉकिंग पावर्स, कर्बस्टोन आदि सभी सरकारी निर्माण कार्यों में अनिवार्य रूप से उपयोग किए जाएंगे।

  • दिल्ली में बड़े अपशिष्ट उत्पादकों के लिए सीधे रीसाइक्लिंग संयंत्रों में निस्तारण अनिवार्य है। MCD ने निगरानी और उचित निपटान सुनिश्चित करने के लिए 311 ऐप और स्थानीय जूनियर इंजीनियर (JE) के माध्यम से कड़ा नियंत्रण लागू किया है।

अन्य पहलें

  • MCD डेयरी क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाएं चला रहा है, जिनमें पृथक ड्रेन और गोबर जमाव कक्ष का निर्माण शामिल है।

  • मानसून में जलभराव को रोकने के लिए शिंगोला में 6.61 एकड़ भूमि पर सिल्ट डिस्पोजल साइट विकसित की जा रही है।

सारांश:
दिल्ली सरकार गोबर से ऊर्जा उत्पादन और ओखला में C&D अपशिष्ट रीसाइक्लिंग पर जोर दे रही है, जो पर्यावरण संरक्षण और यमुना नदी के संरक्षण के लिए एक निर्णायक रणनीति है। ये पहल शहर में स्थानीय और पर्यावरण के अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देती हैं।