दिल्ली सरकार ने विधानसभा में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए विधेयक पेश किया

नई दिल्ली, 4 अगस्त (PTI) — दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने सोमवार को विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन निजी स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए विधेयक पेश किया। उन्होंने दावा किया कि इस बिल को रोकने के लिए “धमकियां” भी दी गई थीं।

दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक, 2025 के अनुसार, निजी स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि हर साल माता-पिता के लिए चिंता का कारण रही है। सूद ने बताया कि शिक्षा माफिया एवं उनके गठजोड़ ने इस विधेयक को टेबल होने से रोकने की कोशिश की, लेकिन सरकार ने दबाव और धमकियों के बावजूद यह कदम उठाया। उन्होंने पूर्ववर्ती आप सरकार पर भी आरोप लगाया कि खास निजी स्कूलों को बिना किसी भय के फीस बढ़ाने की छूट दी गई।

विधेयक के मुख्य प्रावधान:

स्कूल, जिला और राज्य स्तर पर तीन समितियां गठित की जाएंगी, जो फीस वृद्धि तय करेंगी। समिति के फैसले तीन वर्षों तक बाध्यकारी रहेंगे।

प्रत्येक निजी, सहायता-रहित स्कूल—चाहे वे भारतीय, विदेशी पाठ्यक्रम, अल्पसंख्यक या रियायती जमीन पर चलते हों—को हर शैक्षणिक वर्ष 15 जुलाई तक स्कूल स्तर की फीस विनियमन समिति बनानी होगी।

फीस निर्धारण में स्कूल का स्थान, अधोसंरचना और शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक खर्च, स्टाफ वेतन, अधिशेष राशि और अन्य कारकों का मूल्यांकन अनिवार्य होगा।

शिक्षा निदेशक को इन फीस समितियों के अभिलेख की समीक्षा और निर्देश जारी करने की विशेष शक्तियां मिलेंगी।

बिना मंजूरी शुल्क वसूली पाए जाने पर स्कूल को 20 कार्यदिवस के भीतर अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी; विलंब पर दंड रकम दोगुनी, 40 दिन पर तीन गुना एवं इससे आगे बढ़ती जाएगी।

पहली बार उल्लंघन पर ₹1 लाख से ₹5 लाख, दोहराने पर ₹2 लाख से ₹10 लाख का जुर्माना; बार-बार उल्लंघन पर स्कूल की मान्यता निलंबित/रद्द या प्रबंधन अपने हाथ में लेने का प्रावधान।

बकाया फीस के लिए विद्यार्थियों को प्रताड़ित करना, नाम काटना, परीक्षा परिणाम रोकना, कक्षा में बैठने से रोकना या सार्वजनिक अपमान जैसे कार्यों पर ₹50,000 का जुर्माना।

विधेयक न सिर्फ फीस की पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि मौजूदा कानून में फांस रहे निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर भी अंकुश लगाएगा।

विपक्ष की नेता अतिशी ने बिल को ‘चयन समिति’ में भेजने की मांग की और आग्रह किया कि जब तक नया ढांचा लागू न हो, फीस 2024-25 स्तर पर ही स्थिर रखी जाए।

नए बिल के तहत अधिक सख्त निगरानी, वित्तीय पारदर्शिता और शिकायत निवारण तंत्र लाकर अभिभावकों के हितों की सुरक्षा की जाएगी।

PTI

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