नई दिल्ली, 6 अगस्त (PTI) — दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर महिलाओं को संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (CDS) के माध्यम से सशस्त्र बलों में शामिल करने की याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि यदि महिलाओं को CDS के जरिए सेना में प्रवेश से वंचित रखा गया, तो देश को उन अधिकारियों से वंचित रहना पड़ेगा, जैसे कर्नल सोफिया कुरैशी, जिनका ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान हुआ।
यह याचिका कुश कालरा द्वारा दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि महिलाओं को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन अधिकारी बनने का अधिकार संविधान द्वारा दी गई पेशा करने की स्वतंत्रता का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि CDS परीक्षा में महिलाओं को भारतीय सैन्य अकादमी, भारतीय नौसेना अकादमी और वायु सेना अकादमी में आवेदन करने से रोकना असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेदेला शामिल हैं, ने केंद्र सरकार को इस याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 12 नवंबर को तय की गई है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2020 के फैसले का हवाला भी दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि सेना में महिलाओं को कमांड पदों पर नियुक्ति से रोकना असंवैधानिक है। केंद्र सरकार ने महिला अधिकारियों को NDA में शामिल करने की व्यवस्था की है, लेकिन CDS में महिलाओं के प्रवेश पर अभी भी पूर्ण मंजूरी नहीं दी गई है।
यह मामला महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने और सेना में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए अहम पहल है, जिससे देश को सक्षम महिला अधिकारियों से लाभ मिल सके।
SEO टैग्स:
#स्वदेशी, #समाचार, #दिल्ली_हाई_कोर्ट, #महिलाएं_सेना_में, #संयुक्त_रक्षा_सेवा, #CDS_महिलाएं, #समान_अधिकार, #सेना_कमीशन, #कर्नल_सोफिया_कुरैशी, #संवैधानिक_अधिकार