दिल्ली हाईकोर्ट ने अब्दुल राशिद की आतंक वित्तपोषण मामले में आरोप तय होने की चुनौती पर NIA से जवाब मांगा

नई दिल्ली, 31 जुलाई (PTI) — दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को बारामुला सांसद अब्दुल राशिद शेख की उस याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आतंक वित्तपोषण मामले में आरोप तय करने को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और शालिंदर कौर की खंडपीठ ने NIA को नोटिस जारी किया है और एजेंसी को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है।
हाईकोर्ट ने मामले के ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड भी मांगे हैं और इस याचिका की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर तक के लिए निर्धारित की है।

साथ ही, इस मामले में अब्दुल राशिद की नियमित जमानत याचिका भी हाईकोर्ट में लंबित है।
पहले भी हाईकोर्ट ने केवल आरोप तय करने वाली याचिका में लगभग 1,100 दिन की देरी के संबंध में NIA को नोटिस जारी किया था।
राशिद ने एक अन्य याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें जुलाई 24 से अगस्त 4 के बीच हिरासत में संसद सत्र में भाग लेने के लिए प्रति दिन 1.44 लाख रुपये यात्रा व्यय वहन करने का आदेश दिया गया था, साथ ही अंतरिम जमानत मांगी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं को उसी खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है जिसने बजट सत्र के दौरान उनकी एक समान याचिका सुनी थी।

अब्दुल राशिद को 2019 से तिहाड़ जेल में बंद रखा गया है, जब उन्हें 2017 के आतंक वित्तपोषण मामले में NIA ने UAPA के तहत गिरफ्तार किया था।
उनके खिलाफ विशेष NIA कोर्ट ने अक्टूबर 2019 में आरोपपत्र दाखिल किया था और मार्च 2022 में IPC की धाराओं 120B (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 124A (राजद्रोह) तथा आतंकवादी कृत्यों और आतंक वित्तपोषण से संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए थे।
राशिद की याचिका में दावा किया गया है कि वे कश्मीरी वादों के तहत मुख्यधारा के राजनेता हैं और खिलाफ उनके लगाए गए आरोप निराधार हैं।

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