नई दिल्ली, 21 जुलाई (PTI) — दिल्ली पुलिस को एक बड़ी कामयाबी उस समय मिली जब एक वीडियो कॉल के दौरान लिया गया स्क्रीनशॉट दो किशोर लुटेरों की पहचान और गिरफ्तारी की कुंजी बन गया। पुलिस के अनुसार, ये दोनों युवक — हर्ष और आशीष उर्फ सुच्छा, दोनों की उम्र 19 वर्ष और मूल निवासी विकास नगर, दक्षिण पश्चिम दिल्ली — चोरी और लूटपाट की कमाई का इस्तेमाल नशे की लत और होटलों में ऐशोआराम पर करते थे।
आउटर जिले के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा ने एक बयान में कहा,
“इनकी गिरफ्तारी से हम कम से कम सात मामलों — जिसमें लूट और वाहन चोरी शामिल है — की गुत्थी सुलझा पाए हैं।”
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच चोरी की मोटरसाइकिल, एक ऑटो रिक्शा, एक देसी कट्टा, एक चाकू, और एक जिंदा कारतूस बरामद किया है।
DCP शर्मा के अनुसार, दोनों आरोपी लगातार अपराधों में सक्रिय थे— विशेष रूप से वाहन चोरी और इन चुराए गए वाहनों का उपयोग करके सशस्त्र लूटपाट करते थे। जो पैसा ये लूट से प्राप्त करते, उसी से होटल में ठहरकर अपने लिए लक्ज़री जैसी सुविधाएं खरीदते। दोनों ही नशीली आदतों के शिकार हैं।
मामला कैसे उजागर हुआ?
पूरे मामले की शुरुआत 17 जुलाई को हुई जब रन्होला थाना को गुरदयाल विहार स्थित एक सरकारी स्कूल के पास लूट की सूचना मिली। शिकायतकर्ता ने बताया कि दो युवकों ने चाकू की नोंक पर ₹20,000 और उसका मोबाइल लूट लिया।
पुलिस ने तुरंत FIR दर्ज कर एक विशेष टीम का गठन किया। आसपास के इलाकों की CCTV फुटेज खंगाली गई, लेकिन असली सफलता तब मिली जब शिकायतकर्ता की बहन ने लूटा गया मोबाइल नंबर वीडियो कॉल किया। कॉल उठाया गया और उसने चालाकी से आरोपियों की तस्वीर का स्क्रीनशॉट ले लिया— जिससे उनकी पहचान हो गई।
गिरफ्तारी कैसे हुई?
21 जुलाई (रविवार) को पुलिस टीम ने नाला रोड (शुद्धांशु आश्रम के पीछे) बिना नंबर प्लेट वाली बाइक पर दो युवकों को देखा।
पुलिस के रुकने का इशारा करने पर वे भागने लगे, लेकिन टीम ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया।
उनकी तलाशी लेने पर:
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हर्ष के पास से चाकू और
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आशीष के पास से देसी कट्टा और एक जिंदा कारतूस मिला।
साथ ही जिस बाइक पर सवार थे — वह चोरी की निकली, जिसकी इंजन और चैसिस नंबर 14 मार्च को रन्होला थाने में दर्ज शिकायत से मेल खाती थी।
अपराध की योजना और तरीका
पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे रिहायशी इलाकों और पार्किंग से दोपहिया वाहन चुराते, फिर उसी वाहन से लूटपाट करते।
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वे आम तौर पर एकांत और सुनसान जगहों पर अकेले पैदल चलने वालों को निशाना बनाते।
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एक आरोपी चाकू या कट्टा दिखाकर धमकी देता, दूसरा बाइक संभालता।
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लूटे गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल केवल अल्पकालिक संचार के लिए करते और तुरंत फेंक देते ताकि लोकेशन ट्रैक न हो सके।
पुलिस के अनुसार, उनकी पसंदीदा शिकार:
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मोबाइल फोन ले जा रहे राहगीर
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पैसे वाले पैदल यात्री
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सार्वजनिक स्थानों पर लापरवाही से चल रहे लोग
लूटी गई रकम से कैसे जीते थे ‘लक्ज़री लाइफ’:
दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि लूटी गई राशि का इस्तेमाल:
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नशा खरीदने में,
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होटलों में एक-दो रात रुकने,
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और ‘शॉर्ट टर्म लग्ज़री’ आनंद लेने में करते थे।
“Snatch, Spend, and Stay — ये इनका तरीका था,”
— DCP शर्मा ने बताया।
“लूट करते, फिर 1-2 रात तक पैसे वाले जैसे ऐश करते, और उसके बाद फिर अगली लूट की तैयारी।”
सामाजिक पृष्ठभूमि
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हर्ष और आशीष दोनों स्कूल ड्रॉपआउट हैं।
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हर्ष पहले भी छोटे-मोटे अपराधों में शामिल रहा है, जबकि आशीष पर स्थानीय अपराधी गिरोहों का प्रभाव था।
पुलिस अब उनके बाकी साथियों की पहचान करने में लगी है — जिनमें दो संदिग्धों के नाम ‘G’ और ‘S’ हैं, जो, प्राथमिक जांच के अनुसार, इस अपराध श्रृंखला का हिस्सा हो सकते हैं।
यह केस दिखाता है कि डिजिटल सबूत, जैसे वीडियो कॉल का स्क्रीनशॉट, आज के दौर में पुलिसिंग और अपराध सुलझाने का एक शक्तिशाली माध्यम बन चुका है।
इस गिरफ्तारी ने न केवल कई संगीन मामलों को सुलझाने में मदद की, बल्कि समाज में जागरूकता का एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया।
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