नई दिल्ली, 21 जुलाई (PTI) — हर साल मानसून के दौरान जलभराव और नालियों के ओवरफ्लो से जूझने वाली दिल्ली अब इस समस्या के समाधान के लिए एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी भर से निकाली गई सिल्ट (कीचड़/मलबा) के सुरक्षित निपटान के लिए समर्पित सिल्ट डंपिंग ज़ोन स्थापित किया है।
यह नई सुविधा शिंगोला पुनः प्राप्त (reclaimed) लैंडफिल स्थल पर तैयार की गई है, जहां पहले 7.6 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा (legacy waste) बायोमाइनिंग के ज़रिए हटाकर 6.61 एकड़ भूमि को खाली किया गया था।
क्या है इसकी खासियत?
MCD के एक अधिकारी ने PTI को बताया:
“अब यह खाली की गई भूमि एक केंद्रिय, पर्यावरण रूप से सुरक्षित और निगरानीयुक्त स्टेशन के रूप में इस्तेमाल हो रही है, जहां शहरभर की नालियों और तूफानी जल निकासी चैनलों से निकली सिल्ट को डंप किया जा रहा है।”
इस नयी सुविधा का इस्तेमाल कई MCD ज़ोन कर रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
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नरेला
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केशवपुरम
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रोहिणी
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करोल बाग
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सिविल लाइन्स
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सिटी-SP
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शाहदरा साउथ
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शाहदरा नॉर्थ
समस्या क्या थी पहले?
बिना किसी औपचारिक और स्थायी निपटान प्रणाली के कारण, पहले निकाली गई सिल्ट को सड़कों के किनारे छोड़ दिया जाता था, जिससे वह दोबारा बहकर नालियों को जाम कर देती थी।
इससे न सिर्फ जलभराव की समस्या बनती थी, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सफाई पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता था।
इस पहल से कैसे मिलेगा लाभ?
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नालों की सफाई अब सिर्फ हटाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निपटान को भी उचित और सुनियोजित बनाया गया है।
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मानसून के दौरान निचले इलाकों में जलभराव के खतरे में कमी आएगी।
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सड़क किनारे मलबा जमा होने की समस्या भी घटेगी।
MCD का यह कदम शहरी जल निकासी व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने और मानसून से जुड़ी समस्याओं को स्थायी रूप से हल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
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