नई दिल्ली, 6 अगस्त (PTI) — दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि कुत्ते मनुष्यों के महान मित्र हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक और स्नेहपूर्वक रखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करना ने संबंधित अधिकारियों एवं पक्षों को निर्देश दिया कि वे आवारा कुत्तों के पुनर्वास के लिए प्रभावी सुझाव प्रस्तुत करें ताकि राजधानी में इंसान और कुत्तों के बीच उत्पन्न होने वाले संघर्ष को न्यूनतम किया जा सके।
अदालत ने स्पष्ट किया कि कुत्ते या तो घर के अंदर हों या सुरक्षित आश्रयस्थल में, न कि सड़कों पर कूड़ा-करकट खाकर जीवनयापन करें क्योंकि इससे न तो मानव सुरक्षित हैं और न ही कुत्ते। न्यायालय ने यह भी माना कि पिछले लगभग तीन दशकों से कुत्तों की नसबंदी (स्टेरिलाइजेशन) को समाधान माना गया है, लेकिन यह विधि अब तक कारगर साबित नहीं हुई है। देशभर में कई पशु जन्म नियंत्रण केंद्र निष्क्रिय हैं और 78 पशु अस्पताल अनुप्रचलित (नॉन-ऑपरेशनल) हैं।
यह भी सामने आया कि एमसीडी के एक अस्थायी आश्रय गृह को ध्वस्त किए जाने के कारण लगभग 200 कुत्ते सड़क पर लौटाने की योजना पर हैं, जिसे उच्च न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। अदालत ने दिल्ली के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे सभी संबंधित पक्षों, जिसमें दिल्ली सरकार, एमसीडी और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड शामिल हैं, की एक बैठक बुलाकर आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाकर संस्थागत पुनर्वास के लिए व्यापक नीति बनाएं।
अदालत ने कहा कि समस्या की व्यापकता को देखते हुए समन्वित प्रयासों के बिना समाधान संभव नहीं है। इस मुद्दे की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।
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