लोकतंत्र पर सजा के जैसे हमले के रूप में देखें लेफ्ट पार्टियों ने पीएम, सीएम हटाने के बिलों को

नई दिल्ली, 20 अगस्त (PTI) – लेफ्ट पार्टियों ने बुधवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित नए बिल, जो प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी होने पर हटाने की व्यवस्था करते हैं, सीधे तौर पर लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर हमला हैं। उन्होंने इन बिलों का “जहाँतोड़ विरोध” करने की कसम भी खाई।

सरकार बुधवार को तीन बिल संसद में पेश करने की योजना बना रही है, जिनमें प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को अगर 30 दिन तक लगातार गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार या हिरासत में रखा जाता है, तो उनको पद से हटाने का प्रावधान होगा।

CPI(M) के महासचिव एमए बेबी ने X पर कहा, “मोदी सरकार के ये तीन बिल, जो 30 दिन की हिरासत के बाद पीएम, सीएम, मंत्रियों को हटाने के लिए हैं, उनकी नव-फासीवादी प्रवृत्तियों को उजागर करते हैं। ये हमारी लोकतंत्र पर सीधा हमला है, जिसका CPI(M) कड़ा विरोध करेगा। हम सभी लोकतांत्रिक ताकतों से अपील करते हैं कि वे इस कठोर कदम के खिलाफ एकजुट हों।”

एमए बेबी ने कहा कि ये बिल “उच्च पदों पर अपराध के खिलाफ कार्यवाही” का छद्म रूप हैं, जबकि भाजपा-आरएसएस नियंत्रित मोदी सरकार का इतिहास चुनी हुई राज्य सरकारों को कमजोर करने का रहा है। साथ ही, विशेष गहन संशोधन (SIR) के साथ मिलाकर ये बिल लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हैं।

CPI(M) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटस ने इन बिलों को “कठोर” कहा। उन्होंने X पोस्ट में लिखा, “केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नया बिल, जिसे सार्वजनिक हित, कल्याण और सुशासन के नाम पर पेश किया गया है, असलियत में कठोर है और विपक्षी नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को अस्थिर बनाने एवं भारत के संघीय ढांचे को कमजोर करने के लिए बनाया गया है।”

ब्रिटस ने कहा कि बदले की राजनीति के इस युग में, जहां केंद्र की एजेंसियां विपक्षी नेताओं पर कीचड़ फेंकने में जुटी हैं, इस बिल का दुरुपयोग किया जाएगा।

उन्होंने यह भी कहा कि बिल में “संवैधानिक नैतिकता” का ज़िक्र उसके उद्देश्य से भटकाव है, क्योंकि यह सिद्धांत अदालतों द्वारा दोषसिद्धि के बजाय सिर्फ आरोपों या गिरफ्तारी पर अयोग्यता और दंड को जोड़ने के विरुद्ध है। यह सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 में निहित है।

आज की विषाक्त राजनीतिक स्थितियों में, जहां आसानी से आरोप, गिरफ्तारी और लंबी अवधि की हिरासत हो सकती है, ऐसे कानून का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने एवं लोकतांत्रिक आदर्शों को चोट पहुँचाने के लिए किया जाएगा।

CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दिपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि ये बिल संघवाद की मौत की घंटी साबित होंगे।

उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग के पदाधिकारियों की नियुक्ति से लेकर ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की ज़ोरदार कोशिशों तक, इस संशोधन से भारत के संघवाद और संसदीय लोकतंत्र का अंत हो जाएगा।”

भट्टाचार्य ने कहा, “जो भी राज्य भाजपा की राजनीति और नीतियों का विरोध करता है, वह हमेशा अस्थिर और कामकाज से वंचित रहेगा। NDA के सभी सहयोगी बीजेपी के अनुरूप चलने के लिए विवश होंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि ED, CBI, IT, NIA जैसी केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक द्वेष और संकीर्ण स्वार्थों में राज्यपाल कार्यालयों का दुरुपयोग, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने कई बार सख्ती से निंदा की है, अब इस बिल के लागू होते ही कानूनी वैधता प्राप्त कर लेगा।

तीन बिलों को मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी मिली है। ये हैं– यूनियन टेरिटोरिज़ (संशोधन) बिल 2025, संविधान (एक सौ और तिहत्तर संशोधन) बिल 2025, और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025। इन बिलों को संसद की एक समिति को भेजे जाने की संभावना है।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज

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