नई दिल्ली, 9 अगस्त (पीटीआई) – चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि उसने 334 पंजीकृत अप्रमाणित राजनीतिक दलों (RUPP) को सूची से हटा दिया है, जिन्होंने 2019 से अब तक लगातार छह वर्षों में एक भी चुनाव में हिस्सा लेने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं की।
आयोग के अनुसार, इन दलों के कार्यालयों का स्थान भी कहीं भौतिक रूप से पता नहीं चल पाया। ये 334 दल देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से हैं।
कुल 2,854 पंजीकृत अप्रमाणित दलों में से अब 2,520 दल ही मौजूद हैं। वर्तमान में देश में 6 राष्ट्रीय दल और 67 राज्य स्तरीय दल हैं।
इस वर्ष जून में, आयोग ने ऐसे 345 दलों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी और अंततः 334 को सूची से हटा दिया। वर्ष 2001 से अब तक आयोग “तीन से चार” बार निष्क्रिय दलों को सूची से बाहर कर चुका है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पहले आयोग को राजनीतिक दलों को “डीरिकग्नाइज” करने से रोक दिया था क्योंकि यह कानून में मौजूद नहीं है।
लेकिन चुनाव आयोग ने “डीलिस्ट” करने का रास्ता निकाल लिया है। डीलिस्ट हुए दलों को आयोग फिर से सूचीबद्ध कर सकता है, और इसके लिए उन्हें नई मान्यता की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
कुछ RUPPs पर पहले आयकर कानून और मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के उल्लंघन का आरोप भी लग चुका है।
राष्ट्रीय, राज्य और RUPP श्रेणी के सभी राजनीतिक दल संविधान के जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत चुनाव आयोग में पंजीकृत होते हैं। पंजीकरण के बाद दलों को कई सुविधाएं और लाभ मिलते हैं, जिनमें कर छूट भी शामिल है।
यह कार्यवाही राजनीतिक व्यवस्था को साफ करने और ऐसे दलों को हटाने के लिए की गई है, जिन्होंने 2019 के बाद से लोकसभा, विधानसभा या उपचुनावों में हिस्सा नहीं लिया है और जिनका कोई भौतिक पता नहीं लगाया जा सका।
नवीनतम कदम बिहार चुनाव से पहले उठाया गया है। सूची से हटाए गए दल अब चुनाव में उम्मीदवार नहीं उतार सकेंगे।
श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़
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