नई दिल्ली, 4 अगस्त (PTI) — कांग्रेस ने सोमवार को कहा कि हर देशभक्त भारतीय 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से चीन को लेकर जवाब मांग रहा है, लेकिन मोदी सरकार ने “डी.डी.एल.जे.” नीति — “इनकार, ध्यान भटकाना, झूठ बोलना और सही ठहराना” — अपनाकर सच्चाई छुपाने का रास्ता चुना है।
विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार 1962 के बाद भारत को हुए सबसे बड़े भौगोलिक नुकसान की जिम्मेदार है और उसकी भेद्यता और गलत आर्थिक प्राथमिकताओं के कारण वह शत्रुतापूर्ण चीन के साथ “सामान्यीकरण” का रास्ता अपना रही है।
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को भारतीय सेना के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने पर फटकार लगाए जाने के दिन आई। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की एक अदालत में शुरू हुई कार्यवाही को फिलहाल रोक दिया है।
शीर्ष न्यायालय ने राहुल गांधी से पूछा, “आप कैसे जानते हैं कि 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीनी सैनिकों द्वारा कब्जे में है? क्या आप वहां थे? क्या आपके पास कोई विश्वसनीय प्रमाण है?”
कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि 2020 में गलवान घाटी में 20 बहादुर सैनिकों के शहीद होने के बाद से हर देशभक्त भारतीय को जवाब चाहिए था। उन्होंने कहा, “फिर भी मोदी सरकार ने पांच सालों से जवाब देने की बजाय ‘डी.डी.एल.जे.’ नीति से सच्चाई छुपाई है।”
रमेश ने X प्लेटफ़ॉर्म पर सवाल करते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री ने 19 जून 2020 को चीनी घुसपैठ के खंडन को क्यों स्वीकार किया, जबकि उस समय देश के सैनिकों ने बहादुरी से अपने प्राण न्यौछावर किए थे। उन्होंने भारतीय सेना के जनरल उपेंद्र द्विवेदी के ‘अप्रैल 2020 की स्थिति में वापस जाना’ वाले बयान और 21 अक्टूबर 2024 के समझौते पर सवाल उठाया।
रमेश ने कहा कि क्या भारतीय पेट्रोलिंग को अब चीनी अनुमति लेनी पड़ती है जबकि पहले वे क्षेत्र में स्वतंत्रता से जान सकते थे, और क्या गलवान, हॉट स्प्रिंग और पांगोंग त्सो के पास भारतीय पेट्रोलिंग प्वाइंट्स तक पहुंच में बाधा पैदा करने वाले ‘बफ़र जोन’ चीनी कब्ज़े का हिस्सा नहीं?
उन्होंने 2020 में रिपोर्ट किए गए 1000 वर्ग किलोमीटर पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों सहित डिप्सांग इलाके में 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के चीन के नियंत्रण पर भी सवाल उठाए। रमेश ने चीनी आयात की बढ़त, खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक बैटरियां, सोलर सेल और सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर की चीन पर निर्भरता पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि 2024-25 में चीन के साथ व्यापार घाटा अब रिकॉर्ड 99.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
रमेश ने यह भी कहा कि मोदी सरकार दुश्मन चीन के साथ सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जो पाकिस्तान के सैन्य ऑपरेशन्स में हथियार और ‘लाइव इनपुट्स’ प्रदान करता है। उन्होंने इसे भारत के लिए सबसे बड़ा भू-भागीय नुकसान बताया है।
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