रामचरितमानस पर ‘आपत्तिजनक’ टिप्पणी को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ FIR दर्ज

वाराणसी, 3 सितंबर (पीटीआई): पुलिस ने बुधवार को बताया कि रामचरितमानस पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ वाराणसी में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।

स्थानीय अदालत के निर्देश पर मंगलवार को कैंटोनमेंट थाने में यह प्राथमिकी दर्ज की गई।

कैंटोनमेंट स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) शिवकांत मिश्रा ने बताया कि पूर्व भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को अपवित्र करना), 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए शब्द बोलना), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना), 505(2) (विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी पैदा करने या बढ़ावा देने वाले बयान) और 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

याचिकाकर्ता अधिवक्ता अशोक कुमार के अनुसार, मौर्य ने 22 जनवरी, 2023 को एक टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान ये कथित टिप्पणियां की थीं, जिसमें उन्होंने हिंदू धर्मग्रंथ रामचरितमानस और उसके लेखक गोस्वामी तुलसीदास के बारे में अपमानजनक बातें कहते हुए दावा किया था कि “करोड़ों लोग इसे नहीं पढ़ते हैं, यह सब बकवास है। तुलसीदास ने रामचरितमानस अपनी खुशी के लिए लिखी।” कुमार ने कहा कि मौर्य ने सरकार से इस ग्रंथ के “आपत्तिजनक” अंशों को हटाने या पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की भी मांग की थी।

अधिवक्ता ने बताया कि मौर्य के खिलाफ उनकी शुरुआती याचिका अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) द्वारा खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने एक पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसके बाद एसीजेएम नीरज कुमार की अध्यक्षता वाली एमपी-एमएलए अदालत ने 7 अगस्त को पूर्व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने और उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज, राष्ट्रीय समाचार

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