राहुल गांधी बोले: देश मध्यकालीन युग में वापस जा रहा है जहा राजा की मनमानी से गिरफ्तारी होती थी

नई दिल्ली, 20 अगस्त (PTI) – कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश नए बिलों की आलोचना करते हुए कहा कि ये बिल देश को मध्यकालीन युग में लेकर जा रहे हैं, जब राजा अपनी इच्छा के मुताबिक किसी को भी गिरफ्तार करवा सकता था। ये बिल प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को गंभीर अपराधों के आरोप में लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान करते हैं।

राहुल गांधी ने कहा, “बीजेपी का नया बिल बहुत ही खतरनाक है। हम उस दौर में जा रहे हैं जब राजा अपनी मनमर्जी से किसी को भी हटा देता था। चुने हुए लोगों की कोई अहमियत नहीं रहेगी। अगर किसी को पसंद नहीं आया, तो वह ED को केस दर्ज करने को कह देगा और उसी समय लोकतांत्रिक विधायक को 30 दिन के अंदर ही खत्म कर देगा। यह बिल्कुल नया तरीका है।”

वे विपक्ष के उपराष्ट्रपति प्रत्याशी बी सुदर्शन रेड्डी को सम्मानित करने के समारोह में बोल रहे थे।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह महाराष्ट्र की तरह बिहार में भी वोट चोरी करने का प्रयास कर रही है और चेतावनी दी कि ऐसा प्रयास आगामी चुनावों में फेल हो जाएगा।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह संवैधानिक संशोधन बिल संसदीय लोकतंत्र और संघवाद के मूल्यों को कमजोर करता है और इसे सत्र के अंत में बिना उचित बहस और समीक्षा के लाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “पिछले 11 वर्षों में हमने देखा है कि संसद बहुमत का दुरुपयोग करते हुए ED, IT विभाग और CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसियों को विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए शक्तियां दी गई हैं। ये नए बिल राज्य सरकारों को अस्थिर करने के लिए सत्ताधारी पार्टी के हथियार बनेंगे।”

खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि संसद को शासन दल के विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए एक औजार बना दिया गया है, जहां कई महत्वपूर्ण बिल शोर-शराबे में बिना उचित विचार-विमर्श के पास हो जाते हैं।

तीन बिल हैं:

यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025

संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) बिल 2025

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025

ये बिल प्रस्तावित करते हैं कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री किसी गंभीर अपराध के लिए लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहेंगे, तो उन्हें 31वें दिन पद से हटा दिया जाएगा।

सरकार ने बताया कि वर्तमान यूनियन टेरिटरीज अधिनियम, 1963 में ऐसे मामलों के लिए कोई प्रवधान नहीं है, इसलिए इसे संशोधित किया जा रहा है ताकि विधायिका को ऐसे मामलों में मुख्यमंत्री या मंत्री को हटाने का कानूनी अधिकार मिल सके।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज

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