मुंबई, 1 सितम्बर (PTI) – महाराष्ट्र के मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने सोमवार को कहा कि सरकार मराठा आरक्षण मामले के समाधान के लिए कानूनी रूप से ठोस रास्ता तलाश रही है जो अदालत में टिक सके।
आंदोलनकारी मनोज जरांगे, जो मुंबई के आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे हैं, ने सोमवार से पानी पीना भी बंद करने की चेतावनी दी है। उनकी मांग है कि मराठा समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में आरक्षण दिया जाए।
विखे पाटिल, जो मराठा आरक्षण पर गठित कैबिनेट उपसमिति के अध्यक्ष हैं, ने रविवार रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलकर स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम इसका समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे मानना है कि इसमें समय लग रहा है, लेकिन समाधान अदालत में टिक सकने वाला होना चाहिए।”
उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे मुंबई के नागरिकों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित न करें।
फडणवीस अपने दोनों उपमुख्यमंत्रियों एकनाथ शिंदे और अजित पवार से मिलकर सरकार की योजना पर चर्चा करेंगे।
जरांगे ने OBC कैटेगरी में मराठाओं को 10% आरक्षण देने की मांग को लेकर शुक्रवार से आंदोलन शुरू किया है। उनकी मांग है कि सरकार उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार सरकार रिजोल्यूशन (GR) जारी करे।
राज्य सरकार ने रविवार को कहा कि वह मराठा समाज को कुंभी (OBC जाति) का दर्जा देने के लिए हैदराबाद गजेटियर के कार्यान्वयन पर कानूनविदों से राय लेगी।
विखे पाटिल ने भी स्पष्ट किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती कि मराठा और कुंभी एक समान नहीं हैं। इसी के चलते किसी भी समाधान को कानूनी ढांचे के भीतर लाया जाएगा। प्रदर्शनकारी, खासतौर पर मनोज जरांगे, तब तक आंदोलन पर डटे रहने का ऐलान कर चुके हैं जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
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