HC ने अनिल अंबानी के खिलाफ बैंकों की कार्रवाई पर लगाई रोक, RBI दिशानिर्देशों के उल्लंघन का हवाला

**EDS: THIRD PARTY IMAGE, WITH STORY** In this image received on Nov. 3, 2025, industrialist Anil Ambani's family house that has been provisionally attached by the Enforcement Directorate (ED) in a money laundering case, in Pali Hill, Mumbai. (ED via PTI Photo)(PTI11_03_2025_000275B)

मुंबई, 24 दिसंबर (PTI) – बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को इंडियन ओवरसीज बैंक, IDBI बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के खातों को “फ्रॉड” घोषित करने के लिए की जा रही मौजूदा और भविष्य की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि बैंकों ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के मास्टर डायरेक्शंस का उल्लंघन किया है।

न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव ने कहा कि बैंकों की कार्रवाई बाहरी ऑडिटर BDO LLP की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट पर आधारित थी, जिस पर विधिवत योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के हस्ताक्षर नहीं थे। यह RBI के 2024 के मास्टर डायरेक्शंस के तहत अनिवार्य शर्त है, इसलिए ऐसी रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अंतरिम राहत नहीं दी जाती, तो अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस को “गंभीर और अपूरणीय क्षति” हो सकती है, जिसमें ब्लैकलिस्टिंग, ऋण से वंचित किया जाना, आपराधिक FIR दर्ज होना और प्रतिष्ठा को नुकसान शामिल है।

पीठ ने कहा, “प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत इस कहावत पर आधारित हैं कि ‘न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए’।” अदालत ने जोड़ा कि बिना हस्ताक्षरित या अनुचित रूप से योग्य ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर बैंक कारण बताओ नोटिस जारी नहीं कर सकते।

हाई कोर्ट ने बैंकों की देरी पर भी सवाल उठाए और इसे “एक क्लासिक मामला बताया जिसमें बैंक गहरी नींद से जागे हैं।” अदालत ने कहा कि जिस फॉरेंसिक ऑडिट में 2013-2017 की अवधि शामिल थी, वह 2019 में कराई गई।

अनिल अंबानी ने नोटिस को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि BDO LLP एक कंसल्टिंग फर्म है, न कि वैधानिक ऑडिट फर्म, और इसलिए RBI नियमों के अनुसार फॉरेंसिक ऑडिट करने के लिए आवश्यक CA-योग्य हस्ताक्षरकर्ता उसके पास नहीं था। वहीं बैंकों का दावा था कि रिपोर्ट 2016 के RBI मास्टर डायरेक्शंस के अनुरूप है, जिनमें उनके अनुसार CA की अनिवार्यता नहीं थी।

हालांकि, हाई कोर्ट ने दोहराया कि RBI के दिशानिर्देश बाध्यकारी हैं और किसी कंपनी के ऑडिटर की नियुक्ति के लिए CA योग्यता अनिवार्य है। इसके अलावा, BDO LLP द्वारा पहले बैंकों के लिए कंसल्टेंसी सेवाएं देने से हितों के टकराव की स्थिति पैदा हुई, जिससे उसकी स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

श्रेणी: ब्रेकिंग न्यूज़

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