भारत ने पहली राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी किए पशु रक्त बैंक के लिए, पशुधन के जीवन रक्षा हेतु

नई दिल्ली, 25 अगस्त (PTI) – केंद्र सरकार ने सोमवार को देश के लिए पहली व्यापक दिशा-निर्देश जारी की है, जो पशु रक्त संचारण सेवा के लिए है, जिससे आपातकालीन पशु चिकित्सा देखभाल में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर किया जा सकेगा।

‘भारत में पशुओं के लिए रक्त संचारण और रक्त बैंक हेतु दिशा-निर्देश एवं मानक संचालन प्रक्रिया’ नामक दस्तावेज़ में पशु रक्त दान, संग्रह और संचारण के लिए वैज्ञानिक एवं मानकीकृत ढांचा स्थापित किया गया है, जो पहले राष्ट्रीय स्तर पर अनुपस्थित था।

रक्त संचारण को वैश्विक स्तर पर पशुओं में चोट, गंभीर एनिमिया, ऑपरेशन के दौरान रक्त क्षति, संक्रामक रोग और रक्तस्राव विकारों के लिए जीवनदायिनी उपचार माना जाता है। भारत में अभी तक अधिकांश रक्त संचारण बिना मानकीकृत दाता जांच, रक्त प्रकार निर्धारण या संग्रह के प्रोटोकॉल के आपातकालीन तौर पर किया जाता था।

नई दिशा-निर्देश, जिसे पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा जारी किया गया है, रक्त प्रकार निर्धारण और क्रॉस-मैचिंग को अनिवार्य करती है ताकि प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं से बचा जा सके। दाता पात्रता के मापदंडों में स्वास्थ्य, टीकाकरण आवश्यकताएं शामिल हैं, और दाता अधिकार चार्टर के माध्यम से स्वैच्छिक दान पर जोर दिया गया है।

इसमें राज्य-नियंत्रित पशु रक्त बैंक स्थापित करने, बायोसुरक्षा अनुपालन बुनियादी ढांचा विकसित करने, वन हेल्थ सिद्धांतों का समावेशन और दाता पंजीकरण व प्रतिक्रियाओं की रिपोर्टिंग के मानकीकृत कर्यप्रणाली शामिल है।

राष्ट्रीय पशु रक्त बैंक नेटवर्क के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई है, जिसमें डिजिटल रजिस्ट्री, वास्तविक समय में स्टॉक ट्रैकिंग और एक आपातकालीन हेल्पलाइन शामिल होगी। साथ ही, पशु चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रमों में प्रशिक्षण मॉड्यूल भी शामिल किए जाएंगे।

भविष्य की तकनीकी नवीनताओं में मोबाइल रक्त संग्रह इकाइयां, दुर्लभ रक्त प्रकारों के संरक्षण तकनीक, और दाता-ग्राही मिलान के लिए मोबाइल एप्लिकेशन शामिल हैं।

भारत में 537 मिलियन से अधिक पशुधन और 125 मिलियन से अधिक पालतीय पशु हैं, जो राष्ट्रीय GDP में 5.5 प्रतिशत और कृषि GDP में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान देते हैं। ये दिशा-निर्देश पशु जीवन रक्षा, ग्रामीण आजीविका संरक्षण, और पशु कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।

यह दस्तावेज़ विज्ञान, क्षेत्रीय अनुभव और हितधारकों के फीडबैक के आधार पर समय के साथ विकसित होगा, जबकि पशु कल्याण और बायोसुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करेगा।

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