नई दिल्ली, 29 जुलाई (PTI) — दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर की उस दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है, जो दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना द्वारा दायर मानहानि के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई थी।
जस्टिस शलिंदर कौर ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में कोई अवैधता नहीं है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है, इसलिए इसे खारिज कर दिया गया।
यह मामला लगभग 23 साल पुराना है, जब सक्सेना गुजरात में एक एनजीओ के प्रमुख थे।
ट्रायल कोर्ट ने 1 जुलाई 2024 को मेधा पाटकर को IPC की धारा 500 (मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए पांच महीने की साधारण कैद और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
कोर्ट ने माना था कि मेधा पाटकर ने केवल प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से सक्सेना के खिलाफ झूठे और मानहानिकारक बयान जारी किए।
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