नई दिल्ली, 28 अगस्त (PTI) – राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि कंपनियों की ऑडिट कमेटीज़ को ऑडिटर्स की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कार्पोरेट गवर्नेंस के अच्छे अभ्यासों के महत्व पर जोर दिया।
गुप्ता ने वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए महत्वपूर्ण सिद्धांतों को भी रेखांकित किया, जिसमें बाहरी ऑडिटर्स की भूमिका शामिल है। NFRA ने वित्तीय रिपोर्टिंग की गुणवत्ता बढ़ाने और ऑडिटिंग में हुई चूक के खिलाफ कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू की है।
उन्होंने कंपनियों में प्रभावी आंतरिक नियंत्रण और जोखिम प्रबंधन पर जोर दिया, क्योंकि जब तक आंतरिक नियंत्रण मजबूत नहीं होगा, तब तक बाहरी आंकड़े सटीक वित्तीय स्थिति का प्रतिबिंब नहीं दर्शा सकते।
गुप्ता ने कहा कि कंपनियों के प्रबंधन, ऑडिट कमेटी, स्वतंत्र निदेशकों और ऑडिटर्स के बीच प्रभावी संवाद आवश्यक है। ऑडिट कमेटीज़ को ऑडिटर्स की स्वतंत्रता सुनिश्चित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय ऑडिटर्स को जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और तकनीकी का इस्तेमाल भी बढ़ाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सालाना रिपोर्ट में केवल ऑडिट कमेटी के कार्यों का विवरण देने के बजाय उसे अधिक पारदर्शी और समग्र बनाने पर भी विचार किया।
संबंधित पक्ष लेनदेन के बारे में, उन्होंने कहा कि ऑडिटर्स के लिए यह चुनौती होती है कि वे संबंधित पक्षों की पहचान करें और प्रबंधन द्वारा की गई खुलासे की सीमा तक जांच करें।
नितिन गुप्ता ने कहा कि भारत अब बचतकर्ता के बजाय निवेशक देश बनता जा रहा है, इसलिए उच्च गुणवत्ता वाली वित्तीय रिपोर्टिंग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस भरोसा और पारदर्शिता स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके ये विचार व्यक्तिगत हैं और NFRA का औपचारिक दृष्टिकोण नहीं हैं। NFRA की स्थापना अक्टूबर 2018 में कंपनी कानून के तहत की गई थी।
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